बहराइच। गर्मी की छुट्टी के 42 दिन बाद सोमवार को जिले के परिषदीय स्कूल खुल गए। छात्र हंसते-खेलते पहले दिन विद्यालय पहुंचे। शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बच्चों पर फूल बरसाकर व टीका लगाकर स्वागत किया। पहले दिन छात्रों की उपस्थिति काफी कम रही।
गर्मी की छुट्टी के बाद बेसिक शिक्षा परिषद के प्राइमरी व जूनियर सहित प्राइवेट स्कूल सोमवार को सुबह सात बजे खुल गए। पहले दिन अधिकांश कक्षाएं खाली नजर आईं। शहर के प्राथमिक विद्यालय गुदड़ी में 68 बच्चे पंजीकृत हैं, जिसमें सिर्फ 30 बच्चे ही स्कूल पहुंचे।
अकबरपुरा विद्यालय की प्रधान शिक्षिका रंजना रस्तोगी ने बताया कि पहले दिन 68 में से 30 बच्चे स्कूल पहुंचे। प्राथमिक विद्यालय ढपालीपुरवा की प्रधान शिक्षिका 178 बच्चे पंजीकृत हैं, सिर्फ 25 बच्चे आए। प्राथमिक विद्यालय राजकीय कॉलोनी की प्रधानाध्यापिका अकीला बेगम ने बताया कि पंजीकृत 48 बच्चों में 14 बच्चे ही स्कूल पहुंचे।
कैसरगंज में उच्च प्राथमिक विद्यालय भौली की शिक्षिका अर्चना पांडेय ने बच्चों को तिलक लगाया। संविलियन विद्यालय विशेश्वरगंज प्रथम में अध्यापक बच्चों को पढ़ाते नजर आए। प्रभारी प्रधानाध्यापक प्रतिभा शर्मा ने बताया कि विद्यालय की सफाई कराकर शिक्षण कार्य शुरू किया गया है। प्राथमिक विद्यालय बड़नापुर में साफ-सफाई के लिए प्राइवेट कर्मियों को बुलाया गया। प्रभारी प्रधानाध्यापक सुशील यादव ने बताया कि पहले दिन कम बच्चे स्कूल पहुंचे।
शिवपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय असवा मोहम्मदपुर चैन सिसवारा में 88 बच्चे पंजीकृत हैं। सिर्फ 27 बच्चे ही विद्यालय पहुंचे। बच्चों ने बताया कि दोपहर के भोजन में उन्हें रोटी सब्जी व आम खाने को मिला।
योग दिवस पर खुला था स्कूल
परिषदीय स्कूलों में 20 मई से ग्रीष्म कालीन छुट्टी हुई थी। इसके बाद 15 जून को स्कूल खुलने थे। लेकिन भीषण गर्मी के चलते छुट्टी 26 जून तक बढ़ा दी गई थी। इसके बाद अवकाश बढ़ाकर दो जुलाई तक कर दिया गया। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दिन स्कूल खुले थे। तीन जुलाई से स्कूल में छात्रों की पढ़ाई शुरू हो गई है।
रिक्तियां पूरी होने पर पटरी पर आएगी शिक्षण व्यवस्था
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री विजय कुमार उपाध्याय ने कहा कि जिले से 3875 शिक्षकों ने स्थानांतरण की मांग की थी। इनमें 748 शिक्षकों का स्थानांतरण उनके गृह जनपद या आसपास के जिलों में हो गया है। जिले को सिर्फ 58 शिक्षक मिले हैं। 690 शिक्षकों की कमी हो गई है। जबकि पहले से ही शिक्षकों की कमी है। ऐसे में जिले के बाहर शिक्षण का कार्य कर रहे शिक्षकों को गृह जनपद स्थानांतरण कर देना चाहिए।
जिला मीडिया प्रभारी बृजेश कुमार गुप्ता ने कहा कि आकांक्षात्मक जनपदों में विशेष रूप से शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए। प्रत्येक विद्यालय में कम से कम पांच शिक्षकों की नियुक्त के बाद ही जिले की शिक्षण व्यवस्था पटरी पर आ सकेगी।