बहराइच। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सीएचसी व पीएचसी पर अक्सर एक्सपायरी दवाओं को जलाने अथवा उन्हेें जमीन में दबाने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। जबकि एक्सपायरी दवाओं को इस प्रकार से नष्ट किया जाना पूर्णतया गलत है। इससे पर्यावरण के साथ ही मनुष्य व जानवरों को भी नुकसान का खतरा बना रहता है। इसलिए एक्सपायरी दवाओं को नष्ट करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, लेेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा नहीं किया जा रहा। नियमानुसार सरकारी केंद्रों पर एक्सपायरी दवाओं को नष्ट करने से पूर्व उसकी सूची बनाई जानी चाहिए। इसके बाद उसमें से कुछ दवाएं लखनऊ स्थित दवा भंडारण केंद्र पर वापस भेजने के साथ ही अन्य दवाओं को बायोमेडिकल वेस्ट कंपनी को भेज देेना चाहिए ताकि उसे सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जा सके, लेकिन अधिकांश स्थानों पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा।
.........................
हानिकारक है तरीका
दवाओं को जलाने अथवा उन्हें जमीन में दबाने की प्रक्रिया पूरी तरह से गलत है। सभी स्वास्थ्य केंद्रों, निजी अस्पतालों व दवा विक्रेताओं को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए एक्सपायरी दवाओं को नष्ट करना चाहिए।
डॉ.एसके सिंह, सीएमओ।
........................
दवा जलाने पर निकलता जहरीला धुआं
दवाओं को जलाने से उठने वाले धुएं में जहरीले तत्व होते हैं जिनसे लोगों की आंखों व त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे ही जमीन में दवाओं को दबा देने से दवाओं में पड़े रसायन भी मिट्टी में घुल जाते हैं। यह भी जानवरों व मनुष्यों को विभिन्न तरीके से हानि पहुंचा सकते हैं।
डॉ.प्रभाकर मिश्रा, फिजीशियन।