बहराइच। पौष्टिक मोटे अनाज की मांग भारत ही नहीं विदेशों में भी तेजी से बढ़ी है। इसे देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को जारी केंद्रीय बजट में मोटे अनाजों के लिए अन्न श्री योजना की घोषणा की और इसके लिए 2200 करोड़ रुपए देने का वादा किया है। अन्न श्री योजना की घोषणा के साथ ही जिले के कृषि वैज्ञानिकों ने बहराइच को मोटे अनाजों का हब बनाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए कृषि वैैैज्ञानिकों ने कार्ययोजना भी तैयार कर ली है। अब खरीफ सीजन में जागरुकता, गोष्ठी व चौपाल के माध्यम से 100 किसानों को मोटे अनाज के उत्पादन से जोड़ने की तैयारी है। साथ ही जिले में मोटे अनाज का रकबा 15 बीघे से बढ़ाकर 500 बीघे करने का लक्ष्य रखा गया है।मोटे अनाजों की पौष्टिकता व इसके उत्पादन से किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखकर जिले के कृषि विज्ञान केंद्र प्रथम में पहले से ही मोटे अनाज की कई प्रजातियों के उन्नतशील प्रजाति तैयार की जा रही है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक व कृषि विज्ञान केंद्र प्रथम के प्रभारी डॉ. वीपी शाही ने बताया कि मोटे अनाज की उपयोगिता को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2018 को ईयर आफ मिलेट्स (मोटे अनाज) घोषित करते हुए मोने अनाज के प्रति जागरूकता फैलाई थी। साथ ही संयुक्त राष्ट्र संघ में साल 2023 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स के रूप में मनाने का प्रस्ताव दिया था। प्रस्ताव स्वीकार हुआ और संयुक्त राष्ट्र संघ भी साल 2023 को इंनटरनेशनल ईयर आफ मिलेटस के रूप में मना रहा है। मोटे अनाज की उपयोगिता को देखते हुए बीते साल से ही कृषि विज्ञान केंद्र प्रथम पर मोटे अनाज के उन्नतशील बीज तैयार किए जा रहे हैं। किसान सम्मान सम्मेलन पर 17 अक्टूबर को 8 देशों के राजदूत यहां निरीक्षण भी कर चुके हैं और उन्होंने प्रयास की सराहना की थी।
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पौष्टिकता से भरे हैं मोटे अनाज
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. पीके सिंह ने बताया कि मोटे अनाज ज्वार, बाजरा, मक्का, मड़ुआ, सावा, कोदो में पौष्टिकता की भरमार है। इसे देखते हुए समूचा विश्व अब मोटे अनाज के उत्पादन के बारे में सोच रहा है और भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है। उन्होंने बताया कि मडुआ उच्च पोषण वाला मोटा अनाज है। इसमें कैल्शियम की भरपूर मात्रा होती है। प्रति 100 ग्राम मडुआ में 344 मिलीग्राम कैल्शियम होता है। यह डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। इसी प्रकार बाजरा में प्रोटीन की प्रचुर मात्रा होती है। प्रति 100 ग्राम बाजरे में 11.6 ग्राम प्रोटीन, 67.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 8 मिलीग्राम लौह तत्व और 132 मिलीग्राम कैरोटीन होता है। कैरोटीन हमारी आंखों को सुरक्षा प्रदान करता है। ज्वार का ज्यादातर उपयोग डबलरोटी के उत्पादन के लिए हो रहा है। बेबी फूड बनाने में भी ज्वार का इस्तेमाल होता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि रागी भारतीय मूल का अनाज है। इसमें कैल्शियम की मात्रा अन्य अनाजों की अपेक्षा ज्यादा होती है। रागी में लौह तत्व भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो रक्त का मुख्य घटक है। कोदो को प्राचीन अन्न भी कहा जाता है। कोदो में कुछ मात्रा में वसा तथा प्रोटीन भी होता है। इसका ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ कम होने के कारण मधुमेह के रोगियों को चावल के स्थान पर उपयोग करने के लिए कहा जाता है।
15 बीघे से बढ़ाकर 500 बीघा करने का लक्ष्य
कृषि विज्ञान केंद्र प्रथम के प्रभारी डॉ. वीपी शाही ने बताया कि जागरूकता अभियान चलाने के बाद किसानों ने मोटे अनाज के उत्पादन में रुचि दिखाई थी। हुजूरपुर के दुर्गपुर निवासी दिनेश मौर्य, अमरीश मौर्य व चित्तौरा के कटरा बहादुर चक निवासी अशोक मौर्य समेत जिले के सात किसान 15 बीघे पर मोटे अनाज की खेती कर रहे हैं। लेकिन शासन की ओर से बजट में अन्न श्री योजना की घोषणा के बाद अब मोटे अनाज के रकबे को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। जल्द ही जागरूकता के लिए अभियान चलाया जाएगा और 500 बीघे में मोटे अनाज की फसल लहराएगी।
किसानों की बढ़ेगी आय
मोटे अनाज अपनी पौष्टिकता के लिए अलग पहचान रखते हैं। इन अनाजों के प्रयोग से कई बीमारियां नहीं होती हैं। इसे देखते हुए वर्तमान में इसकी मांग बढ़ी है। जहां अन्य अनाज 20 से 30 रुपए प्रति किलो बिक रहे हैं, तो वहीं मोटे अनाज 50 से 90 रुपए किलो है। किसान मोटे अनाज की खेती कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
डॉ. वीपी शाही, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक
चलाया जाएगा वृहद जागरूकता अभियान
मोटे अनाज हमारे स्वास्थ्य के साथ-साथ किसानों की आय दोगुनी करने के भी साधक बन सकते हैं। जागरूकता के अभाव में किसान मूल फसलों को बोते हैं। जिले में मोटे अनाज के प्रति किसानों को जागरुक करने के लिए जल्द बैठक कर जागरूकता अभियान की रुपरेखा तैयार की जाएगी और अभियान चलाया जाएगा। डॉ. दिनेश चन्द्र, डीएम