- करानी पड़ रही महंगी जांच, लानी पड़ रही बाहर से दवा, मरीज परेशान
- कागजी बने मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के दावे
संवाद न्यूज एजेंसी बहराइच। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के दावे मेडिकल कॉलेज में कागजी साबित हो रहे हैं। इसके चलते ही मरीजों को निजी केंद्रों से अल्ट्रासाउंड जांच कराने के साथ ही बाजार से महंगी दवाओं को खरीदने की परेशानी भी उठाना पड़ रही है। अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए मरीजों की लंबी वेटिंग चल रही है जबकि कई जरूरी दवाओं का भी टोटा लगातार कायम बना है।
लगभग 40 लाख की आबादी वाले जिले में 14 सामुदायिक व 51 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ ही मेडिकल कॉलेज है। पीएचसी व सीएचसी में इलाज सुविधाओं की कमी के कारण मजबूरी में मरीजों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ही जाना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज में जिले के मरीजों के साथ ही गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती व नेपाल के भी मरीज इलाज कराने आते हैं। लेकिन यहां मरीजों को दवा व जांच के लिए परेशान होना पड़ रहा है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए एक महीने तक का इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में तकलीफ से छुटकारे के लिए जल्दी इलाज शुरू कराने के लिए निजी केंद्रों पर जाकर महंगी जांच कराने को मजबूर होना पड़ता है।
रक्तचाप से लेकर इंफेक्शन तक की दवा का टोटा
मेडिकल काॅलेज से संबद्ध अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को ब्लड प्रेशर, उल्टी, पेट में कीड़े मारने की दवा, कैल्शियम, मल्टी विटामिन ड्रॉप, वैक्टीरियल इंफेक्शन, एंटी एलर्जी तक की दवा नहीं मिलती। शुक्रवार को दवा काउंटर पर पहुंचे मरीजों को यह दवा बाजार से खरीदने की सलाह देकर लौटा दिया। पूरे बस्ती गड़रियनपुरवा निवासी प्रेमा पत्नी गगन व खत्रीपुरा निवासी मुवीन अहमद ने बताया कि अस्पताल से खांसी बुखार व रक्तचाप व इंफेक्शन से राहत दिलाने के लिए लिखी गई दवाएं न मिलने के कारण बाहर से खरीदना पड़ी।
शिकायत की धमकी बाद दूसरे दिन हुई जांच
पयागपुर तहसील के मुंडेरवा ठकुराइन गांव निवासी ठाकुर प्रसाद मिश्र ने बताया कि शांति देवी को 22 जून को मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर को दिखाया था। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिखा। जांच कराने गए, तो डॉक्टर ने एक महीने बाद आने के लिए कहा। इस पर आला अफसरों से शिकायत करने की धमकी देने पर अल्ट्रासाउंड कर रहे डॉक्टर ने 23 जून को आकर जांच कराने के लिए कहा।
एक महीने बाद होगा अल्ट्रासाउंड
चित्तौरा के राजापुर निवासी दीनानाथ ने बताया कि उन्होंने एक महीने पहले मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर को दिखाया था। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा था। लेकिन कोई ज्यादा समस्या न होने पर वह शुक्रवार को एक महीने बाद अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आए हैं। उनका नंबर लगा हुआ है। नंबर आने पर अल्ट्रासाउंड कराएंगे।
दो बजे बंद हो जाती जांच
मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा होना चाहिए। इसके बावजूद दोपहर में दो बजते ही अल्ट्रासाउंड जांच करने वाले कक्ष पर ताला पड़ जाता है। ऐसे में सिर्फ कोई बड़ी घटना हो जाने अथवा किसी वीआईपी के आने पर ही जांच के लिए अल्ट्रासाउंड कक्ष खुलता है।
सिर्फ एक रेडियोलॉजिस्ट के कारण परेशानी
मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी नहीं है। सभी दवाएं मौजूद हैं जो मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही है। रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण जांच कराने के लिए जरूर मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल में सिर्फ एक रेडियोलॉजिस्ट की ही तैनाती है। ऐसे में भीड़ अधिक हो जाने पर दूसरे अस्पताल में भी रेडियोलॉजिस्ट को बुलाकर जांच का कार्य कराया जाता है। - डॉ.ओपी चौधरी, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज