बहराइच। पयागपुर विकासखंड में मिली वित्तीय अनियमितता की शिकायत पर मनरेगा लोकपाल ने जांच की थी। इस दौरान 83 हजार का अपव्यय मिलने पर प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायक से समानुपात में रिकवरी का आदेश दिया था। इसको सभी ने लोकपाल अपीलीय अथॉरिटी में चैलेंज किया था जिसे अथॉरिटी रद्द करते हुए लोकपाल के आदेश को बहाल रखा है।
पयागपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत पड़री में मनरेगा योजना के तहत खोदे गए तालाब में वित्तीय अनियमितता की शिकायत मिली थी। मनरेगा लोकपाल उमेश तिवारी ने स्थलीय निरीक्षण किया था। जांच में मनरेगा के तहत किए गए 411 दिनों के कार्यदिवस के बाद भी कार्य पूर्ण नहीं मिला था।
लोकपाल ने इसे 83, 844 रुपए का अपव्यय करार देते हुए हुए इसे समानुपात में ग्राम प्रधान मुनीजर, सचिव यशवन्त सिंह व तत्कालीन तकनीकि सहायक गोपाल शरण जायसवाल से रिकवरी का आदेश दिया था। आदेश के बाद तीनों ने इसे लोकपाल अपीलीय अथॉरिटी में चैलेंज किया था। जिसे जांच के बाद अध्यक्ष लोकपाल अपीलीय अथॉरिटी विभा तिवारी ने रद्द कर दिया है।