बहराइच। थाना पयागपुर क्षेत्र की दो वर्षीय रेप पीड़िता मासूम के इलाज में लापरवाही बरतने के मामले में सीडब्ल्यूसी न्याय पीठ ने कड़ा संज्ञान लिया है। मामले में न्याय पीठ ने प्रदेश के प्रमुख सचिव व महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को शिकायती पत्र भेजकर लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।
पयागपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में बीते 17 अप्रैल की रात एक दो वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म हुआ था। मासूम को लहूलुहान हालत में रात दस बजे जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कालेज के महिला अस्पताल लाया गया था। यहां इमरजेंसी कक्ष में कोई भी महिला चिकित्सक मौजूद नहीं थीं।
पीड़िता को लाने वाली महिला आरक्षी हिमांशी ने इसकी सूचना न्याय पीठ के चेयरमैन को दी। महिला आरक्षी ने चेयरमैन से यह भी बताया कि इमरजेंसी में एक पुरूष चिकित्सक सचिन मौके पर मिले। इमरजेंसी में महिला चिकित्सक ममता बसंत की ड्यूटी थी। लेकिन उनसे बात करने पर उन्होंने दूसरे दिन आने को कहा था।
आरक्षी की सूचना पर चेयरमैन ने एसपी सिटी को सूचना देकर वस्तुस्थिति से आवगत कराया था। उसके बाद मासूम का इलाज तो शुरू हुआ लेकिन उसे आनन-फानन मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया। इस दौरान दो घंटे तक मासूम चिकित्सालय में दर्द से तड़पती रही।
घटना को बाल कल्याण समिति की न्याय पीठ के चेयरमैन सतीश श्रीवास्तव सदस्यगण दीपमाला प्रधान व नवनीत मिश्रा ने गंभीरता से लेते हुए चिकित्साकर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा था। लेकिन स्पष्टीकरण न मिलने के बाद अब न्यायपीठ ने प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव व महानिदेशक चिकित्सा एंव स्वास्थ्य को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई करने को कहा है।
पीठ के चेयरमैन श्रीवास्तव ने बताया कि डा.सचिन महिला इमरजेंसी वार्ड में कैसे ड्यूटी कर रहे थे। जबकि ड्यूटी चार्ट में उनका नाम नहीं था। ड्यूटी चार्ट में महिला चिकित्सक रिचा यादव व ममता बसंत का नाम था। दोनों चिकित्सक ड्यूटी से कहां गायब थी। उन्होंने बताया कि चिकित्साकर्मियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।