सुजौली के त्रिलोकीगौड़ी में बाघ के हमले में किसान की मौत के बाद बिलखते परिजन। :स्रोत ग्रामीण
अकेले बेझा गांव में 21 दिनों में पकड़े जा चुके हैं चार तेंदुए, डर का माहौल
मिहींपुरवा(बहराइच)। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग का सुरम्य जंगल वन्यजीवों के साथ साथ पर्यटकों को भी काफी पसंद है। यहां पर जंगली जडी-बूटी के साथ-साथ बेशकीमती साल के पेड के साथ-साथ बाघों व तेंदुओं की संख्या भी काफी है। लेकिन पर्यटकों को लुभाने वाले ये बाघ व तेंदुए बीते कई दिनों से ग्रामीणों के लिए भय का कारण बन गए हैं। जंगल के बाहर गन्ने के खेतों में आसान शिकार की तलाश में तेंदुए बाहर निकल रहे हैं और हमलावर भी हो रहे हैं। तेंदुओं का जंगल छोड़कर आबादी की ओर रूख करने को ग्रामीण जंगल में भोजन की कमी से भी जोड़ कर देख रहे हैं।
21 दिन में पकड़े गए तेंदुए
- 30 सितंबर को ककरहा रेंज के बेझा के मजरा धरमपुर में
- 1 अक्तूबर को सुजौली रेंज के सुजौली गांव में
- 3 अक्तूबर को सुजौली रेंज के अयोध्यापुरवा गांव में
-4 अक्तूबर को ककरहा रेंज के बेझा के मजरा पचासा में
- 9 अक्तूबर को ककरहा रेंज के बेझा में
- 17 अक्तूबर को रात को सुजौली के अयोध्यापुरवा गांव में
-20 अक्तूबर को ककरहा रेंज के बेझा के मजरा पकडिया में