बहराइच। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के मकसद से ग्रामीण क्षेत्रों में एएनएम सेंटर खोले गए हैं। हालांकि एएनएम की कमी से जिले के कई सेंटर बंद रहते हैं। जिससे गर्भवती महिलाओं व बच्चों को स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। मरीजों को इलाज के लिए मजबूरन मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है।
मिहींपुरवा के 14 सेंटरों पर नहीं तैनात एएनएम
मिहींपुरवा (बहराइच)। ग्राम पंचायतों में टीकाकरण सहित विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 72 एएनएम सेंटर हैं, जिसमें वर्तमान में 58 एएनएम नियुक्त हैं। 14 एएनएम सेंटर प्रभारियों द्वारा संचालित होते हैं। मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र में बरसात में बाढ़ से लोगों को छोटी-मोटी बीमारियों से जूझना पड़ता है। जिससे ज्यादातर लोग एएनएम सेंटर का सहारा लेते हैं, लेकिन उनकी कमी से गर्भवती महिलाएं परेशान होती हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि मिहींपुरवा सीएचसी में 14 एएनएम कम हैं। शासन ने जल्द रिक्त पद भरने का निर्देश दिया है।
कभी नहीं खुलता एएनएम सेंटर
बौंडी (बहराइच)। तेजवापुर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत कटहा के मजरा केशवापुर स्थित एएनएम व हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में ताला लगा है। यहां एएनएम तो तैनात है पर सीएचओ का पद खाली है। गांव की नीलम व संगीता ने बताया कि एएनएम सेंटर पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी कभी नहीं आती हैं। उपकेंद्र पर ज्यादातर ताला पड़ा रहता है। यहां उच्चाधिकारियों का निरीक्षण न होने से स्वास्थ्यकर्मी मनमाने तरीके से स्वास्थ्य उपकेंद्र का संचालन करते हैं। जिससे गर्भवती महिलाओं को टीका व इलाज के लिए भटकना पड़ता है।
खजुरार व पुरैना एएनएम सेंटर जर्जर
विशेश्वरगंज (बहराइच)। विशेश्वरगंज ब्लॉक क्षेत्र में 40 एएनएम सेंटर हैं। जिसमें खजुरार व पुरैना एएनएम सेंटर जर्जर है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. धीरेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि खजुरार व पुरैना का केंद्र जर्जर होने से वैकल्पिक व्यवस्था से केंद्र चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीएचसी व पीएचसी के अलावा ग्राम पंचायत तकिया, गुजरा, मानिकापुर, प्रतापपुर व ग्राम पंचायत निगोह एएनएम सेंटरों पर महिलाओं का प्रसव हो रहा है।