अपनी विविधता के लिए प्रसिद्ध कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग अब बाघों की मौत से चर्चा में है। यहां मात्र पांच महीने में ही दो बाघों की मौत हो चुकी है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसके लिए बाघों की संख्या के अनुसार जंगल का दायरा न होना बता रहे हैं। इसके इतर वन्यजीव प्रभाग के जिम्मेदार मृत बाघों को नेपाली बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसा तब है जब कतर्नियाघाट बाघों की संख्या के हिसाब से प्रदेश में पहला स्थान रखता है।
2023 की बाघ गणना में मिली खुशखबरी
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग 551 वर्ग किलोमीटर में फैला है। अभी यहां 59 बाघ, 250 से अधिक तेंदुआ, सात हजार हिरन व सौ से अधिक संख्या में जंगली हाथी विचरण करते हैं। वर्ष 2023 की गणना में यहां बाघों की संख्या में दोगुनी वृद्धि हुई। पूर्व में यहां बस 30 ही बाघ थे, लेकिन थर्मोसेंसर व ट्रैपिंग कैमरे की गणना में इनकी संख्या बढ़कर 59 हो गई। इसी के साथ कतर्नियाघाट प्रदेश में सर्वाधिक बाघ पाये जाने वाला अभ्यारण्य बन गया।
तो ज्यादा देर नहीं रहते नेपाली वन्यजीव
सेवानिवृत्त वनाधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि पड़ोसी देश नेपाल का रायल बर्दिया नेशनल पार्क कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के पास ही है। वहां के बाघ, तेंदुआ व हाथियों को यहां का जंगल खूब पसंद आता है। लेकिन ऐसा कभी-कभी ही होता है कि नेपाली वन्यजीव लंबे समय तक यहां रहें। बाघ की मौत होने पर पीठ पर बनी धारी व पदचिह्नों के आधार पर पहचान की जाती है।
बाघों पर खतरे को ऐसे समझें
सेवानिवृत्त वनाधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि एक नर बाघ के विचरण के लिए औसतन 10 से 12 वर्ग किलोमीटर जंगल की आवश्यकता होती है। वहीं एक नर बाघ के क्षेत्र में एक से तीन बाघिन रह सकती हैं। ऐसे में कतर्नियाघाट क्षेत्र में 59 बाघों के विचरण के लिए लगभग 708 वर्ग किलोमीटर जंगल की आवश्यकता है, जबकि जंगल का दायरा 551 वर्ग किलोमीटर ही है। यह बाघों के लिए संकट का विषय है। इसी कारण बाघ आबादी का रुख कर रहे हैं। इससे उनपर संकट भी गहरा रहा है।
पांच माह में दो तो तीन साल में चार बाघों की मौत
09 अक्तूबर 2021 : चौधरी चरण सिंह गिरिजा बैराज में बाघ का शव मिला
24 मई 2022 : कतर्नियाघाट रेंज कार्यालय के पास झाड़ियों में बाघ मृत मिला
30 सितंबर 2023 : बर्दिया गांव के पास जंगल में घायल मिले बाघ की मौत
14 जनवरी 2024 : चौधरी चरण सिंह गिरिजा बैराज से बाघिन का शव मिला