अब्दुल्लागंज जंगल से सटे नेपाल में बीते दिनों मिल चुकी दो बाघों की खाल
तीन साल में बाघ के हमले में जा चुकी 8 लोगोें की जान, तीन घायल
- विश्व बाघ दिवस पर विशेष,
संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच। कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार का अनुकूल वातावरण बाघों की तादाद बढ़ाने में कारगर साबित हो रहा है। 550 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले कतर्निया में 1975 से ही बाघों के संरक्षण पर काम चल रहा है। इसी का नतीजा है कि यहां बाघों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है।
09 अक्तूबर 2021 को एक बाघ का शव गिरजापुरी बैराज के डाउन स्ट्रीम में दो सौ मीटर की दूरी पर मिला। वन विभाग ने मौत का कारण डूबना बताया। इसके पश्चात 24 मई 2022 को कतर्नियाघाट रेंज कार्यालय के पीछे नर बाघ का शव मिला। पोस्टमार्टम से पता चला कि दूसरे बाघ से संघर्ष में इसकी मौत हुई है। इसी माह पिंजड़ा लगाकर पकड़ी गई मादा बाघिन को आदमखोर बता लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया गया और नर बाघ दुधवा नेशनल पार्क छोड़ा गया। इस प्रकार कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग ने अपने चार बाघों को खो दिया। वहीं बाघ व मानव का संघर्ष भी हुआ है। इसमें जहां तीन साल में आठ लोगों की जान गई है वहीं तीन लोग घायल हो चुके हैं।
शिकारियों से भी बाघों को खतरा
बहराइच वन प्रभाग व कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग नेपाल से सटे है। बहराइच रेंज में अब्दुल्लागंज से सटे नेपाली इलाकों में बीते दो माह में दो बाघों की खाल बरामद हो चुकी है। इससे साफ है कि नेपाली शिकारी यहां सक्रिय हैं। इसके साथ ही वन विभाग ने दो शिकारियों को भी पकड़ा है। इनमें एक नेपाल का निवासी है तो दूसरा गुजरात पा रहने वाला है।
बाघिन को मिला जीवनदान
वर्ष 2021 में यहां शिकारियों के फंदे में फंसी बाघिन की एक माह तक मचान पर कैमरे के माध्यम से निगरानी की गई। आखिरकार बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर फंदा काटा गया और उपचार करने के बाद स्वतंत्र रूप से विचरण के लिए घने जंगल में छोड़ दिया गया।
कतर्नियाघाट में वर्ष 2018 की गणना के मुताबिक करीब 30 बाघ थे। लेकिन इस समय यहां पर बाघों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। इस समय लगभग 40 बाघ व उनके शावक भी मौजूद हैं। बाघों को शिकारियों से खतरा बना रहता है। इसके लिए वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी में लगी रहती हैं।
-आकाशदीप बधावन, डीएफओ, कतर्नियाघाट, वन्यजीव विहार