बहराइच/जरवलरोड। प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के तार बहराइच से जुड़े रहे हैं और सबसे ज्यादा जरवल से इसकी संलिप्तता मिल रही है। शनिवार की रात भी आतंकवाद निरोधक दस्ते ने बहराइच से दो लोगों को हिरासत में लिया जिसमें से एक जरवल के वैराकाजी का रहने वाला है।इससे पूर्व भी जरवल से एटीएस ने पीएफआई से रिश्ता रखने वाले कई लोगों को दबोचा है। ऐसे में अब जरवल के लोग सहमे हुए हैं। साथ ही लोग जिले के खुफिया तंत्र के फेल होने की भी बातें कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि बाहर से टीमें आकर लोगों को गिरफ्तार कर रही है, लेकिन जिले का तंत्र सालों बीतने के बाद भी पता नहीं लगा पाता।
देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते सरकार की ओर से पीएफआई को बैन किया गया है। साथ ही सरकार की ओर से लगातार पीएफआई से जुड़े लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इस दौरान बहराइच के जरवल का नाम बार-बार चर्चा में आ रहा है और लगातार जरवल का पीएफआई कनेक्शन सामने आ रहा है। शनिवार को गिरफ्तार किया गया जरवल के वैराकाजी निवासी नजमुज्जमां उर्फ नजम बीते कई दिनों से जरवल में डेरा जमाए था।
यहां तक की उसने अपनी भाभी को नगर पंचायत चुनाव में बतौर अध्यक्ष प्रत्याशी के रुप में उतारा था और पूरी बागडोर अपने हाथ में लेकर चुनाव प्रचार कर रहा था। यही नहीं स्थानीय लोगों के मुताबिक चुनाव में उसने अच्छे खासे रुपए भी खर्च किए। किसी को भी उसके पीएफआई कनेक्शन के बारे में भनक तक नहीं लगने दी।
मसूद को मथुरा पुलिस ने किया था गिरफ्तार
जरवल के जिस वैराकाजी गांव से शनिवार को एटीएस ने नजमुज्जमां उर्फ नजम को हिरासत में लिया है, उस वैराकाजी निवासी का नाम पहले भी देश विरोधी गतिविधियों में आ चुका है। साल 2020 में वैराकाजी निवासी मसूद अहमद को दिल्ली से हाथरस जाते समय मथुरा टोल प्लाजा से मथुरा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मसूब पीएफआई के स्टूडेंट युनिट से जुड़ा बताया जा रहा था।
सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट वायरल करने पर जरवल से साहबे आलम को और 2019 में पथराव व तोड़फोड़ मामले में रिजवान समेत दो को गिरफ्तार किया गया था। इनका भी नाता पीएफआई से बताया जाता है। यही नहीं जरवल कस्बा के कटरा दक्षिण निवासी कमरुद्दीन उर्फ बब्बू एनआईए व एसटीएफ की संयुक्त टीम ने दबोचा था। कमरुद्दीन भी जरवल में रहकर बढ़ईगीरी का काम करता था। उसे भी पीएफआई से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।