बहराइच। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान रविवार को महसी के महराजगंज में युवक की निर्मम हत्या किसी साजिश का नतीजा तो नहीं थी। हत्या से पूर्व सुनियोजित तरीके से विसर्जन जुलूस में बवाल और पत्थरबाजी उसके बाद युवक की गोली मारकर हत्या करना खुफिया तंत्र व पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रही है।
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श्रद्धालुओं पर पुलिस लाठी चार्ज पर भी सवाल
विसर्जन जुलूस के दौरान जब दोनों पक्षों में झड़प शुरू हुई, अगर उसी समय जुलूस में ड्यूटी पर तैनात पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी दोनों पक्षों को समझा बुझाकर शांत कराने में दिलचस्पी लेते, तो शायद इतनी बढ़ी घटना नहीं होती, लेकिन पुलिस के जिम्मेदारों ने दोनों पक्षों को समझाने के बजाए एक पक्ष पर लाठीचार्ज कर दिया। इससे जिले का अमन चैन तो बिगड़ा ही साथ में महराजगंज की आग पूरे जिले में फैल गई।
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शहर में भी श्रद्धालुओं पर बरसी पुलिस की लाठी
महाराजगंज में हुई युवक की हत्या के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज लाया गया तो गुस्साए परिजनों के साथ लोगों ने शव को मेडिकल कॉलेज के सामने रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। लेकिन वहां भी पुलिस की मानवता नहीं दिखाई दी। पुलिस ने पहले अपनी दबंगई के बल पर गुस्साए लोगों को शांत करने के बजाए सड़क से जबरन हटाने की कोशिश की, लेकिन लोगों के भड़के गुस्से के सामने पुलिस को पीछे हटना पड़ा। इसके बाद पुलिस की लाठियां आला अधिकारियों के सामने श्रद्धालुओं पर जमकर बरसीं। हालत यह रही कि अस्पताल चौराहे और चौक बाजार पर पुलिस ने निर्दोष श्रद्धालुओं पर जमकर लाठियों से पीटा। इस दौरान सड़क से निकलने वाले बाइक सवारों को भी पुलिस ने नहीं बख्शा।