बहराइच। मनरेगा के कार्यो में जिले में जमकर अनियमितता हो रही है। एक गांव में तालाब खुदवाने के नाम पर घाघरा नदी किनारे कछार में खोदाई कर लाखों रुपये गबन करने का मामला सामने आया है। तहसील महसी के एक गांव में नदी के कछार में ट्रैक्टर से खोदाई चल रही थी। जिसकी शिकायत एक ग्रामीण ने की थी। मनरेगा उपायुक्त ने जब जांच कराई तो मामला सही पाया। इस पर उपायुक्त ने अब तक कराए गए कार्य को श्रमदान घोषित कर दिया है।
तहसील महसी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कायमपुर निवासी अमित कुमार सिंह ने सीडीओ को शिकायत कर बताया था कि गांव के प्रधान गोमती प्रसाद, ग्राम पंचायत सचिव राजवंत व ग्राम रोजगार सेवक सरिता देवी ने मनरेगा का धन गबन करने के उद्देश्य से घाघरा नदी के कछार में छह माह तक जलमग्न रहने वाली भूमि पर नदी से 100 मीटर दूर तालाब की खोदाई करवा रहे है। खुदाई में मनरेगा श्रमिकों को न लगाकर पांच ट्रैक्टर से खुदाई करा रहे थे। इसकी शिकायत उन्होंने सीडीओ से की थी। सीडीओ ने इसकी जांच उपायुक्त श्रम रोजगार केडी गोस्वामी को सौंपी थी।
उपायुक्त श्रम रोजगार ने बताया कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने छह जून को प्रकरण की जांच की, तो मामला सही पाया गया। उन्होंने बताया कि घाघरा नदी के किनारे तालाब की खोदाई चल रही थी। बाढ़ के दौरान तालाब का अस्तित्व समाप्त हो जाता। खुदाई में श्रमिकों का प्रयोग न कर ट्रैक्टर से कार्य किया जा रहा था। इसलिए तालाब खुदाई के कार्य की परियोजना को श्रमदान घोषित किया जाता है। पूरे मामले की रिपोर्ट सीडीओ को सौंपने की बात कही है।