बहराइच। जिले में नगर निकायों का कार्यकाल कई उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरा है। इस दौरान कई बार चेयरमैन पद पर काबिज के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी आए। कभी प्रभारी चेयरमैन को कुर्सी सौंपी गई तो कभी प्रशासक की तैनाती हुई। जिले की नगर पालिका नानपारा में सबसे ज्यादा 17 वर्ष तक तो सबसे कम ढाई साल तक सदर नगर पालिका प्रशासन की कमान प्रशासकों के हाथ में रही। जबकि रिसिया नगर पंचायत का काम काज सात सालों तक प्रशासक के सहारे चला। मौजूदा समय में निकाय चुनाव की घोषणा में हो रही देरी से एक बार फिर नगर निकायों का संचालन प्रशासक के हाथ में सौंपे जाने की तैयारी शुरू हो गई है।
पहली बार 1990 में आया था अविश्वास प्रस्ताव
जिले की सदर नगर पालिका को साल 1948 में नगर निकाय का दर्जा मिला था। इसके बाद वर्ष 1990 में पहली बार यहां तैनात चेयरमैन शब्बीर अहमद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया था। इसके बाद उन्हें हटाकर तेजे खां को कार्य वाहक अध्यक्ष बनाया गया। उनके हटने के बाद साल 1992 में यहां पहली बार प्रशासक की तैनाती हुई। इसके बाद दिसंबर 1992 में हुए चुनाव में तेजे खां ने जीत हासिल की। इसके बाद 22 जनवरी से 30 नवंबर 95 तक और वर्ष 2005 में एक दिसंबर से 15 नवंबर 06 तक यहां प्रशासक का कब्जा रहा। बीते वर्ष 2012 के बाद से लगातार समय पर चुनाव होने से निर्वाचित चेयरमैन ही कार्यभार संभाल रहा है।
12 साल बाद मिला पूर्ण निकाय का दर्जा
जिले की नगर पालिका नानपारा को 1972 में उप नगर पालिका का दर्जा मिला था। उस समय यहां प्रशासक जरूर तैनात था लेकिन सभासदों का चुनाव होता रहा। 12 साल के लंबे अंतराल के बाद 1984 में नगर पालिका परिषद नानपारा को पूर्ण रूप से नगर निकाय का दर्जा प्राप्त हुआ। पहली बार 1988 में नानपारावासियों को चेयरमैन चुनने का मौका मिला था। यहां 1990 में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव आया था। उस समय तत्कालीन चेयरमैन हाजी गफ्फूर बख्श को हटाकर कमल नयन अग्रवाल को प्रभारी चेयरमैन बनाया गया था। हालांकि फरवरी 1993 में न्यायालय के आदेश पर प्रभारी चेयरमैन को हटाकर जीपी श्रीवास्तव को प्रशासक नियुक्त करना पड़ा।
गठन के सात साल बाद पहला चुनाव
रिसिया नगर पंचायत का गठन वर्ष 1982 में हुआ था। रिसिया नगर पंचायत अस्तित्व में आने के बाद यहां की कमान प्रशासक के हाथों में सौंप दी गई गई थी। करीब 7 वर्षों तक रिसिया नगर पंचायत की कमान प्रशासक के हाथों में रहने के बाद पहली बार यहां साल 1989 में हुए चुनाव में रिसियावासियों ने निकाय चुनाव में मतदान करते हुए निर्दल प्रत्याशी महमूद अहमद को अपना चेेयरमैन चुना था। उसके बाद से यहां नियमित तौर पर निकाय चुनाव होते रहे हैं।
पहली बार 1980 में चुना गया चेयरमैन
जरवल नगर पंचायत 1995 में अस्तित्व में आई थी। इसके बाद यहां के प्रशासनिक काम काज की जिम्मेदारी बतौर प्रशासक तत्कालीन एसडीएम को सौंप दी गई थी। गठन के बाद लगातार पांच वर्षों तक यहां प्रशासन की काम काज एसडीएम के हाथों में रही। पहली बार 1980 में यहां के मतदाताओं ने मतदान कर अफर मेंहदी को अपना चेयरमैन चुना था।