बहराइच/फखरपुर। एक गरीब व लाचार पिता अपनी नन्हीं परी की जान बचाने के लिए जिले से लेकर राजधानी तक अस्पतालों का चक्कर लगाता रहा लेकिन उसे वेंटीलेटर नहीं मिला। अंत में नवजात ने दुनिया को अलविदा कह दिया। यदि वेंटीलेटर मिल गया होता तो शायद उसकी पुत्री आज जिंदा होती।
फखरपुर के घासीपुर निवासी सईद अहमद बताते हैं कि उनकी पत्नी हासमीन को नार्मल डिलिवरी हई थी। सांस लेने में तकलीफ पर वे नवजात को फखरपुर के प्राइवेट इकाना हॉस्पिटल लेकर गए जहां वेंटीलेटर की सुविधा नहीं मिली। इस पर वे शहर के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे और भर्ती कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी रुपए की मांग किया कहा कि नवजात को आधुनिक वेंटीलेटर की आवश्यकता है। प्रतिदिन लगभग 10 हजार रुपए चार्ज आएगा, जो आयुष्मान कार्ड से सरकार इतना नहीं देती है।
पीड़ित ने इसे लिखित रूप से मांगा तो डॉक्टर ने बिना बताए रेफर कर दिया और कहा एंबुलेंस से वे लखनऊ लेकर पहुंचे, जहां नवजात को भर्ती कराने के लिए मेडिकल कॉलेज, लोहिया अस्पताल दौड़ते रहे, लेकिन वेंटीलेटर नहीं मिला। जिससे उसकी बच्ची ने दो जून की रात लगभग पौने दो बजे अंतिम सांस ली।
जैसा मेरी बेटी के साथ हुआ वैसा किसी के साथ न हो
सईद ने बताया कि उनके दो पुत्र हैं एक 7 साल का और दूसरा 4 साल का। रोते हुए कहा कि जैसा मेरे साथ हुआ है ऐसा किसी बच्ची के साथ न हो। मां बाप कितनी दुआएं प्रार्थना के बाद बेटी मांगते हैं। बड़े किस्मत वाले होते हैं जिन्हें बेटी नसीब होती है। मेरी बेटी उनके लिए बड़ी कीमती थी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व जिलाधिकारी मोनिका रानी को ट्वीट कर मामले की जानकारी दी है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने वेंटीलेटर होने का किया दावा
नवजात बच्चों के लिए वेंटीलेटर कितने हैं के सवाल पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.संजय खत्री ने कहा कि संडे के दिन उनके पास कोई इंनफारमेशन नहीं होती है। फखरपुर कर नवजात बच्ची को वेंटीलेटर न मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके पास वेंटीलेटर की पर्याप्त व्यवस्था है।