बाबागंज (बहराइच)। मौसम परिवर्तन के कारण वायरल फीवर, खांसी और डायरिया के मरीज बढ़ने लगे हैं। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सीएचसी चर्दा में बुखार की सबसे जरूरी दवा पैरासिटामोल सहित कई दवाएं नहीं हैं। इससे मरीजों को मजबूरन बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। सीएचसी में तीन साल पहले एक्स-रे मशीन भेजी गई पर उपकरण नहीं भेजे गए जिससे मशीन कमरे में बंद धूल फांक रही है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चर्दा में प्रतिदिन लगभग 300 मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। यहां एक महीने से दवाओं की कमी मरीजों को खल रही है। शनिवार को ऐसा ही नजारा देखने को मिला। सीएचसी चर्दा व पीएचसी बाबागंज में मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ी। सीएचसी के एक कर्मचारी ने बताया कि पिछले एक महीने से ग्लूकोज, आईवी सेट, पैरासिटामोल टेबलेट व सीरप आदि दवाएं नहीं हैं। डेंटल सर्जन डॉ राजेश सिंह ने बताया कि दांत के इलाज के लिए सामान नहीं है। मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है।
चर्दा निवासी विपिन श्रीवास्तव ने बताया कि पत्नी कई दिनों से बीमार है। शनिवार को वे सीएचसी में इलाज कराने आए थे। डॉक्टर ने देखकर दवा लिख दी। अस्पताल से दवा न मिलने के कारण वे बाहर से खरीदने जा रहे हैं। बस्ती गांव निवासी राहुल सिंह ने बताया कि उनके दाहिने हाथ में चोट लगी थी। अस्पताल में पट्टी न होने से इलाज नहीं हो सका।
आठ महीने से नदारद दो डॉक्टर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चर्दा की डॉ. श्रुति श्रीवास्तव व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बाबागंज की डॉ. निधि गुप्ता आठ महीने से नदारद हैं। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है। लापरवाह डॉक्टरों की रिपोर्ट अधीक्षक ने सीएमओ को भेजी, किंतु उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
अस्पताल में एक्स-रे मशीन है। टेक्नीशियन भी तैनात है, लेकिन सामान न होने से एक्स-रे नहीं हो पा रहे है। दवा आदि के लिए जिला स्तर पर डिमांड भेजी गई है।
- डॉ. आरएन वर्मा, सीएचसी अधीक्षक चर्दा