बहराइच। जिले में पीएफआई का नेटवर्क काफी मजबूत है। बीते दिनों नेपाल बॉर्डर से तीन सदस्यों को एसटीएफ ने दबोचा भी था। इनसे पूछताछ में पता लगा है कि इस संगठन को नेपाल के रास्ते विदेशों से फडिंग की जा रही थी। पुलिस इस संगठन के नेपाल में बैठे लोगों को भी पता कर रही है। इसके अलावा स्थानीय नेटवर्क को भी पूूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए पुलिस ने काम तेज कर दिया है।
नेपाल का सीमावर्ती जिला शिक्षा, रोजगार और विकास में पिछड़ा हुआ तो है ही लेकिन और खराब हालात हालात तब हो गए जब यहां के युवा देशद्रोही गतिविधियों में शामिल होने लगे। बहराइच जिला भारत-नेपाल का सीमावर्ती होने के नाते अति संवेदनशील की श्रेणी में आता है। देशविरोधी गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले कई लोग यहां से गिरफ्तार हो चुके हैं। बीते कुछ दिनों में यहां से एनआईए,एटीएस व एसटीएफ ने चार पीएफआई कार्यकर्ताओं को भी उठाया था।
सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) को लेकर हुए प्रोटेस्ट के दौरान भी पीएफआई की भूमिका सामने आई थी। 20 दिसंबर, 2019 को बहराइच में सुनियोजित पथराव और तोड़फोड़ मामले में पीएफआई के दो कार्यकर्ता पकड़े गए थे। रिजवान और वलीउर्राहमान मौलवी बनकर यहां एक मदरसे में रह रहे थे। स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी 1998 तक यहां काफी सक्रिय रही। यहीं से देशद्रोही स्पीच देने के मामले में सिमी का राष्ट्रीय अध्यक्ष शाहिद बद्र फलाही गिरफ्तार हुआ। बाद में सिमी पर बैन लगा। (संवाद)
लश्कर-ए-तैयबा के भी जुड़े तार
लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी कमांडर इरफान के भी तार बहराइच से जुड़े होने की बात सामने आ चुकी है। उसका एक मकान भी शहरी क्षेत्र में है। लेकिन इस समय इरफान दिल्ली जेल में बंद है। इसी तरह इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा अफजल उस्मानी भी करीब डेढ़ माह तक कपड़े के कारोबार के बहाने बहराइच में रहा। यही नहीं, जम्मू लिबरेशन फ्रंट के लोग भी इस खुली सीमा रेखा का फायदा भी उठाने से नहीं चूके। जम्मू लिबरेशन फ्रंट के तीन संदिग्ध आतंकी सीमा क्षेत्र रुपईडीहा में गिरफ्तार हो चुके हैं। जो पाकिस्तान से बिना वीजा के नेपाल होते हुए कश्मीर जा रहे थे। तंजानिया का एक जासूस भी भारत-नेपाल सीमा पर पकड़ा जा चुका है। चीन के तीन संदिग्ध लोग भी पकड़े जा चुके हैं जो सीमा सुरक्षा बल के कार्यालयों, सुरक्षा जवानों और सीमा के द्वार का फोटो खींच रहे थे।
विदेशों से हो रही फडिंग
बीते दिनों नेपाल बॉर्डर से पकड़े गए तीन लोगों में एक शिक्षक है। हालांकि इनके परिजन व गांव वाले इस बारे में कुछ भी बोलने से कतरा रहे है। लेकिन कुछ ग्रामीणों की माने तो ये तीनों पीएफआई के सक्रिय सदस्य बताये जा रहे हैं। इनमें से एक सदस्य 22 सितंबर को पीएफआई के खिलाफ लखनऊ में छापेमारी शुरू होते ही नेपाल भाग गया था। वह बीते रविवार शाम को ही बहराइच में घुसा था। इसी दौरान एसटीएफ और एनआईए ने उसे पकड़ लिया। यह सदस्य रिसिया के शैदा बभनी गांव का रहने वाला है। विश्वस सूत्रों की माने तो इन लोगों को नेपाल के रास्ते अन्य कई देशों से फंडिंग होती है। इस पैसे से यह संगठन में लोगों को जोड़कर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की ट्रेनिंग देते है।
नेपाल बॉर्डर क्षेत्र में विशेष सतक्रता बरती जाती है। पुलिस टीम लगातार चेकिंग कर संदिग्धों पर कार्रवाई करती है। जो लोग भी गलत कार्यों में लिप्त मिलेंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। -केशव चौधरी, एसपी