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Bahraich News: तटबंध पर दिन काट रहे बाढ़ पीड़ित

Sat, 29 Jun 2024 02:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
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महसी क्षेत्र के संगवा समदा गांव के निकट तटबंध पर झोपड़ी बनाकर रहते नौबस्ता गांव के कटान पीड़ित। -
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15 वर्षों से मदद की आस में गुजर रहे पीड़ितों के दिन, जिले की चार तहसीलों में बाढ़ से मचती है तबाही
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बौंडी(बहराइच)। हर साल कहर बरपाने वाली बाढ़ का दंश झेलने वाले पीड़ितों को मरहम लगाने वाला कोई नहीं है। तमाम परिवार लगातार 15 साल से तटबंध पर झोपड़ी बनाकर गुजर-बसर कर रहे है। बेलहा-बेहरौली तटबंध पर एक दर्जन से अधिक कटान पीड़ित परिवार सहित झुग्गी-झोपड़ी बनाकर गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ पीड़ितों को ठहरने के लिए 45 शरणार्थी स्थल प्रभावित तहसील क्षेत्रों में बनवाए हैं।
बाढ़ की समस्या से परेशान प्रशासन ने बीते वर्ष कुछ कटान पीड़ितों को जमीन आवंटित की थी। लेकिन उनका पट्टा नहीं बन सका। जिससे उन्हें अभी तक कब्जा भी नहीं मिला है। नतीजन कटान पीड़ित तटबंध पर रहने को मजबूर हैं। वर्ष 2009 में घाघरा नदी ने नौबस्ता के टेढ़ी गांव के लगभग दो दर्जनों घरों को अपने आगोश में ले लिया था। जिससे गांव के लोग खुद के आशियाने को तरस रहे थे। परिणाम स्वरूप ग्रामीणों ने बेलहा बेहरौली तटबंध पर अपना आशियाना बनाया। लेकिन 15 वर्ष बाद भी कटान पीड़ितों को अब तक न तो जमीन ही उपलब्ध कराई गई और न ही इनको किसी प्रकार की सरकारी इमदाद ही मिली है। संवाद
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इन पीड़िताें को मदद की दरकरार
नौबस्ता के टेढी गांव के कटान पीड़ित ईदु राईनी, खैरात, मोहयद्दीन, अली रजा, वारिस, मुबारक, सुल्तान, मेहंदी हसन, शमशेर, अनवर, सरवर, राजितराम, गनी, इदरीश, युनुस, सेहरे आलम, मकदूम, नूरे, औलाद के मकान घाघरा नदी में समाहित हो गया था। लेकिन अभी तक कटान पीड़ितों को जमीन नही मिल सकी। पीड़ित तटबंध के किनारे झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं।

नाप जोख के बाद नहीं मिला पट्टानौबस्ता गांव के कटान पीड़ितों ने बताया कि एक वर्ष पूर्व जैतापुर गांव के निकट कुछ लोगों को तहसील द्वारा जमीन नाप कर दी गई थी। लेकिन इसके बाद भी उनका पट्टा नहीं बन सका और न ही कोई कागजात मिले थे। जिससे ग्रामीणों को जमीन पर कब्जा नहीं मिला सका। नौबस्ता गांव के टेढ़ी गांव निवासी आशिक, सबीरा, हनीफ, सकीना, रासूला इब्राहिम, बहादर, अब्दुल हक, मेहंदी ,तजम्मूल, निजामुद्दीन को तहसील प्रशासन ने जमीन आवंटित की थी। लेकिन इनका पट्टा नहीं बन सका और न ही कोई जमीन का अभिलेख प्रशासन द्वारा दिया गया। जिससे ग्रामीणों को उस जमीन पर कब्जा भी नहीं मिला सका।
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बनवाए गए 45 शरणार्थी स्थल
बाढ़ग्रस्त लोगों की मदद के लिए प्रभावित तहसीलों मिहींपुरवा, महसी, कैसरगंज व नानपारा में मनरेगा योजना से 45 शरणार्थी स्थल बनाए गए है। जिन बाढ़ पीड़ितों के घर कटान में बह गए है उनको पीएम आवास देने की प्रक्रिया चल रही है। बाढ़ की समस्या का सामना करने वाले लोगाें की हर संभव मदद करने का प्रयास जिला प्रशासन के द्वारा किया जा रहा है।-मोनिका रानी, डीएम
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