बाढ़ पीड़ितों तक नहीं पहुंची मदद, सिर्फ शिवपुर क्षेत्र में लगाई गईं 21 नावें
महसी क्षेत्र में प्राइवेट नावों का सहारा, लंच पैकेट व राहत सामग्री न मिलने से रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच। जिले में बाढ़ का कहर थम नहीं रहा है। तीन तहसील क्षेत्रों मोतीपुर, महसी तथा नानपारा के 90 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। सरकारी सहायता के नाम पर सिर्फ शिवपुर ब्लॉक क्षेत्र में 21 नावें लगाई गई हैं जबकि महसी इलाके के जिन बाढ़ पीड़ितों के पास निजी नाव है उसी से आ-जा रहे हैं। लंच पैकेट आदि सामग्री न मिलने के कारण बाढ़ पीड़ितों में रोष है।
महसी ब्लॉक के ग्राम पंचायत बकैना का मजरा चकदहा, मुड़खलिया, पारा, गौरिया, डिहुवा, कोठार, ग्राम पंचायत केवलपुर, धनावा का मजरा रामसहायपुरवा, किशुन बगिया, ग्राम पंचायत बांसगढ़ी का मजरा खरखट्टनपुरवा, बसावन बेली, चमारन पुरवा, तेलियन पुरवा, ग्राम पंचायत बहदुरिया, खोझवा, विद्यापुरवा, बिचनू पुरवा, बद्री पुरवा, लोधन पुरवा, पचदेवरी, मैकू पुरवा, अंगरौरा दुबहा, कोटिया, पूरे हिन्दू सिंह, महसी टेपरा आदि गांव बाढ़ के पानी से जलमग्न हैं।
सबसे ज्यादा बुरा हाल गौरिया, किशुन बगिया, मांझादरिया बुर्द, खरखट्टनपुरवा, बसावन बेली, चमारन पुरवा, तेलियन पुरवा, चकदहा का है, जहां अभी तक कोई सरकारी सहायता पीड़ितों तक नहीं पहुंच सकी है। राजस्व कर्मचारी बिना नाव के इन पीड़ितों तक नहीं पहुंच सकते हैं।
अंधेरे में गुजर रही बाढ़ पीड़ितों की रात
बहराइच। कोई घटना या दुर्घटना न हो जाए इसके लिए बाढ़ प्रभावित गांवों की बिजली काट दी गई है। पहले कोटे की दुकानों पर केरोसिन मिलता था, जिससे लोग चिराग जलाकर अपना गुजारा कर लेते थे, लेकिन अब वह भी नहीं मिलता। पीड़ितों के घरों सहित चारों तरफ पानी ही पानी है जिससे जहरीले जीव जंतुओं का खतरा रहता है। ऐसे में सैकड़ों लोगों की रात बिना उजाले के बीत रही है। लेकिन प्रशासन की ओर से एक अदद मोमबत्ती तक नहीं उपलब्ध कराई गई है।
पुल के ऊपर ढाई फिट चल रहा पानी, जोखिम में जान
खैरीघाट (बहराइच)। महसी ब्लॉक के ग्राम पंचायत गरेठी गुरुदत्त सिंह के मजरा ठकुरन गरेठी में तालाब पर पुल बना हुआ है। यह पुल डूब गया है। इस पर लगभग दो-ढाई फुट पानी चल रहा है। नाव की व्यवस्था न होने के कारण लोग जान जोखिम में डालकर बाढ़ पीड़ित लाठी के सहारे बाजार से आते-जाते हैं। यदि जरा सी चूक हुई तो 20 फीट गहरे पानी में चले जाएंगे।
बता दें कि महसी व शिवपुर ब्लॉक के 50 गांव बाढ़ से जलमग्न हैं। महसी इलाके में न तो कोई लंगर चलाया गया है और न ही पीड़ितों से कोई हालचाल देने पहुंचा है। निचले इलाकों के गांवों से तीसरे दिन पानी निकलने लगा है। खाना बनाने के लिए अभी भी जगह नहीं है। जिनके मकान पक्के हैं वे छत पर शरण लिए हुए हैं। चिलचिलाती धूप में उन्हें बड़ी परेशानी हो रही है। मवेशियों के चारे का संकट है। लोगों का जनजीवन बुरी तरीके से प्रभावित है।
वहीं शिवपुर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत अंबरपुर का मजरा पसियन पुरवा, कंडा बेली, अहिरन बेली, कोरियन बेली, लौकिहा, तिगड़ा, बल्दूपुरवा, बेलामकन, पाठक पुरवा, एकघरा, बाजपुरवा, चौकसाहार, चीरपुर, ढकिया, गैल, जोधीपुरवा, पंडित पुरवा, पिपरिया, सैय्यद नगर, गुजराती पुरवा, डल्ला पुरवा, सोहबतिया, बितनिया, बरुही टेपरी, नरोत्तम पुर आदि गांव बाढ़ से जलमग्न हैं। इन गांवों में जिला प्रशासन की ओर से 21 नावें लगाई गई हैं।
एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 54 सेमी ऊपर बह रही नदी
जरवलरोड (बहराइच)। सरयू की लहरें एल्गिन ब्रिज व घाघराघाट पुल पर भीषण ठोकर मार रही हैं। यहां नदी तीन दिनों से खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जलमापक जगदीश कुमार ने बताया कि बुधवार को सुबह 6:00 बजे एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 106.696 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो नदी खतरे के निशान से 62 सेमी ऊपर था। वहीं दोपहर 2:00 बजे नदी का जलस्तर 106.636 मीटर मापा गया, जो खतरे के निशान से 54 सेमी ऊपर है। उन्होंने बताया कि सुबह से नदी का जलस्तर घटने लगा है।
मिहींपुरवा में घटा जलस्तर, कैसरगंज भी बाढ़ की चपेट में
मिहींपुरवा/कैसरगंज (बहराइच)। लगातार दूसरी बार बाढ़ आने के कारण मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र के 40 गांव जलमग्न हुए थे। लगभग 50 हजार की आबादी प्रभावित थी। तीसरे दिन इन गांवों से पानी निकलने लगा है जिससे बाढ़ पीड़ितों ने राहत महसूस की है। कई संपर्क मार्ग खुल गए हैं। दूसरी तरफ कैसरगंज तहसील तहसील क्षेत्र में बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है। बुधवार को गोड़हिया नंबर दो से गोड़हिया नंबर तीन जाने वाले मार्ग पर बाढ़ का पानी भर गया जिससे लोगों को परेशानी हुई।