बहराइच। तराई में लगातार मौसम परिवर्तन से बच्चे उल्टी-दस्त, बुखार, पेट दर्द के साथ ही पीलिया रोग की चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ी है और प्रतिदिन ओपीडी में लगभग 250 बच्चे पहुंच रहे हैं। लक्षण वाले बच्चों की जांच के दौरान 15 से 20 बच्चे पीलिया रोग से ग्रसित निकलते हैं।
विभिन्न बीमारियों से पीड़ित सैकड़ों बच्चे प्रतिदिन मेडिकल कालेज में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें हेपेटाइटिस व पीलिया रोग से भी ग्रसित बच्चे होते हैं। शनिवार को चिल्ड्रेन वार्ड में विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 30 बच्चे भर्ती हैं। इसमें पूर्वाह्न 11 बजे तक पांच बच्चे भर्ती किए गए हैं। इस वार्ड में ज्यादातर डायरिया पीड़ित बच्चे भर्ती हैं। वहीं पीआईसीयू वार्ड गंभीर बच्चों से भर गया है। यहां 10 बेडों पर 11 बच्चे भर्ती थे। जबकि चार बच्चों के स्वस्थ होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.एसके त्रिपाठी ने बताया कि हाथों की सफाई न करने से दूषित पानी व भोजन करने की वजह से बच्चे पीलिया और हेपेटाइटिस के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि ओपीडी में इन दिनों लगभग 250 बच्चे विभिन्न रोगों से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं।
लक्षणयुक्त बच्चों की जांच कराने के बाद 15 से 20 बच्चे पीलिया व हेपेटाइटिस बीमारी से पीड़ित मिलते हैं। गंभीर बच्चों को फौरन भर्ती कर लिया जाता है। इलाज के बाद सभी बच्चे ठीक हो जा रहे हैं।
सी-आर्म मशीन खराब होने से नहीं हो रहे ऑपरेशन बहराइच। मेडिकल कॉलेज में लगी सी-आर्म मशीन एक सप्ताह से खराब पड़ी है जिससे मरीजों के हड्डी के जुड़े ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। मशीन बनाने के लिए पत्राचार किया गया, किंतु अभी तक मशीन नहीं बन सकी है।
सी-आर्म एक छोटी एक्स-रे मशीन की तरह काम करती है। इस मशीन के सहयोग से डॉक्टर ऑपरेशन करते समय अंगों के थ्री-डी चित्र देख सकते हैं और टूटी हड्डी को जोड़ते समय प्लेट, रॉड लगाने की सही स्थिति का पता लगाते हैं। कौन सा स्क्रू, रॉड, कहां डालनी है यह इस मशीन के आधार पर ही लगाए जाते हैं। लेकिन मशीन खराब होने से ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं।