कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को बौद्ध अनुयायियों से गुलजार रही। बर्मा व कोरिया से आए अनुयायियों ने आनंद बोधि में विशेष प्रार्थना की। इस दौरान अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु शीला सारा के नेतृत्व में तपोस्थली का भ्रमण भी किया।
बौद्ध भिक्षु शीला सारा ने कहा कि मन की चंचलता पर संयम पा लेने पर ही ज्ञान में एकाग्रता बढ़ती है। बुद्ध ने अपने उपदेशों को विचार पूर्वक ग्रहण करने की आज्ञा दी थी। क्योंकि प्रत्येक मनुष्य को अपना निर्वाण स्वयं को प्राप्त करना होता है। ज्ञान को आंतरिक अवस्था में परिणत करने के लिए प्रज्ञा, शील, समाधि आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि सत्य का साक्षात्कार तब तक नहीं हो सकता, जब तक विचार व कर्म का संयम न हो। पूजन के उपरांत अनुयायियों ने सहेट महेट आदि का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की।
कंपोजिट विद्यालय रेहगांव गोंडा व बीएमपीईएस पडरौना के छात्रों का दल भी रविवार को शैक्षिक भ्रमण पर तपोस्थली पहुंचा। प्रधानाध्यापक रेनू ने कहा कि बच्चों का शैक्षिक भ्रमण कराने से मानसिक, शारीरिक व नैतिक विकास होता है। इस दल ने जेतवन की परिक्रमा कर आनंद बोधि पर माता विद्यावती के अध्यक्षता में पूजन किया। संवाद