मिहींपुरवा (बहराइच)। प्रकृति की मनोरम छटाओं से घिरा कतर्नियाघाट में इन दिनों नेपाल से आए टस्कर हाथियों ने नाक में दम कर रखा है। हाथियों का उत्पात इतना ज्यादा है, कि जंगल से सटे गांवों के बाशिंदे दहशत में जिंदगी जीने को मजबूर हैं। हाथियों ने बीते दो महीनों में तीन लोगों को पैरों तले कुचल कर मार डाला है तो वहीं तीन लोगों को गंभीर रूप से घायल किया।
हाथियों ने ग्रामीणों के घरों व खेतों को भी नहीं छोड़ा है और दर्जनों किसानों के घरों व फसलों को तहस-नहस कर दिया है। हाथियों से बचाव को लेकर वन विभाग भी कोई ठोस उपाय करते नहीं दिख रहा है। इससे स्थानीय लोगों में रोष देखने को मिल रहा है। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग से सटे गांवों में इन दिनों नेपाल के रायल बर्दिया पार्क से आए टस्कर हाथियों का उत्पात देखने को मिल रहा है। बताते चलें कि बीते दो महिनों में हाथियों ने नौ ग्रामीणों पर हमला किया है। वहीं तीन ग्रामीणों ने भाग कर अपनी जान बचाई।
हाथियों के हमले के पीड़ितों ने बताया कि हाथी देर रात हमला कर देते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों कई घरों को तोड़ दिया है और उसमें रखा अनाज, गृहस्थी का सामान भी नष्ट कर दिया है। ग्रामीणों को हजारों का नुकसान हुआ है, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई मुआवजा भी नहीं दिया जाता। हमले से बचने के लिए हाथियों को एकजुट होकर थाली, गोला व पीपा बजाकर गांव से बाहर खदेड़ा जाता है। वहीं नेपाली हाथियों का झुंड अक्सर कतर्नियाघाट जाने वाले मार्ग पर डेरा जमाए रहते हैं, जिसके चलते आवागमन में भी परेशानी होती है।हाथियों के झुंड ने बीते चार जनवरी को जमुनिया गांव में किसानों की फसल को पैरों तले रौंद दिया। वहीं खेत में काम रहे किसान गोविंद को दौड़ा लिया, किसान ने भाग कर किसी तरह जान बचाई। 19 जनवरी को निषाद नगर में तीन मिट्टी के घर व एक टिनशेड के मकान को हाथियों ने धराशायी कर दिया, जिसमें ग्रामीणों का हजारों का नुकसान हुआ। 31 जनवरी को बनियापुरवा गांव में हाथियों ने 20 बीघा फसल को रौंद डाला और सात फूस के मकान उजाड़ दिए। नौ फरवरी को जंगल के किनारे नेवलापुर के पास सरसों की 20 बीघा फसल को हाथियों ने तहस नहस कर दिया। 12 फरवरी को बिछिया बाजार में हाथियों ने हमला कर कन्हैया का मकान गिरा दिया। 24 फरवरी को वन रक्षक अजय सिंह पर हमला कर हाथियों ने उसे मरणासन्न कर दिया।