श्रावस्ती। अपनी विभिन्न मांगों के निराकरण को लेकर विद्युत कर्मियों ने मंगलवार को मशाल जुलूस निकाला। इसके बाद भी उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ। इससे नाराज विद्युत कर्मियों ने बुधवार से विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले 72 घंटे का कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। निगम कर्मी मांग पूरी न होने पर आंदोलन को और धार दे सकते हैं। प्रदर्शन कर रहे विद्युत कर्मियों का आरोप हैं कि उनका तीन दिसंबर को ऊर्जामंत्री से लिखित समझौता हुआ था। जिसे अब तक लागू नहीं किया गया है। ओबरा व अनपरा में दो दो इकाईयों का निर्माण कार्य एनटीपीसी लिमिटेड को सौंपने का एमओयू किया गया है। जबकि यह दोनों परियोजनायें मूलतया राज्य विद्युत उत्पादन निगम की हैं। इसके अतिरिक्त पारेषण में 220 एवं उच्च विभव के पारेषण के बिजली उपकेंद्रों एवं लाइनों के निर्माण एवं रख रखाव का कार्य निजी घरानों को सौंपने की कार्यवाही चल रही है। जिसका निगम कमी विरोध करते हैं। 03 दिसम्बर के समझौते के बावजूद कार्यरत एवं सेवानिवृत्त बिजली कर्मियों के घरों पर मीटर लगाने की कोशिश हो रही है। जिससे बिजलीकर्मियों को मिल रही रियायती बिजली की सुविधा समाप्त की जा सके। बिजली कर्मियों, निविदा व संविदा कर्मचारियों की समस्याओं का तत्काल समाधान कराया जाए।
2000 के बाद नियुक्त हुए सभी बिजली कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाए। नियमित पदों पर नियमित भर्ती हो। ऊर्जा निगमों में कार्यरत निविदा व संविदा कर्मचारियों को समान पद पर समान मानदेय दिया जाए। यदि मांग पूरी न हुई तो विद्युत कर्मियों ने अनिश्चित कालीन हड़ताल व जेल भरो आंदोलन की चेतावनी दिया है। इस मौके पर काफी संख्या में विद्युत कर्मी मौजूद रहे।