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दिन में एक बार खाना, बैठकर गुजारीं पांच रातें

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यूक्रेन से घर वापस आए छात्र युवराज सोनी। - फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। हम सभी खारकीव नेशनल मेडिकल कॉलेज में थे, कि अचानक सायरन बजने लगा। कॉलेज प्रशासन ने तत्काल सभी छात्रों से हॉस्टल में बने बंकर में छिपने को बोला। हम सभी भाग कर बंकर में चले गए। एक छोटा सा बंकर और सैकड़ों लड़के, अंदर सही से बैठने की जगह भी नहीं थी। सभी छात्रों से मोबाइल बंद करने को बोल दिया गया। एक रॉकेट हमारे कॉलेज के बाहर भी आकर गिरा। पूरे पांच दिन हम सभी हॉस्टल में बने बंकर में रहे और जागते रहे। बंकर में बैठने के अलावा लेटने की कोई जगह नहीं थी। खाना भी कम होने के कारण दिन में केवल एक बार ही दिया जाता था। यह दास्तां है यूक्रेन से अपने घर सकुशल लौटे घसियारीपुरा मोहल्ला निवासी युवराज सोनी की। जिनकी दास्तां सुनकर परिवार भावुक हो गया।
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शहर के घसियारी पुरा मोहल्ला निवासी युवराज सोनी पुत्र सरलेश सोनी यूक्रेन के खारकीव नेशनल मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं, जो रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच खारकीव में फंस गए थे। रविवार को सकुशल घर पहुंचने के बाद सोमवार को उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ अपना दर्द साझा किया। उन्होंने बताया कि बंकर में रहने के दौरान हर समय लगता था, कि जिंदगी का आखिरी दिन है। युद्ध शुुरू होने के कुछ दिन पहले खाने की कुछ चीजें लेकर आए थे, वर्ना भूख से मौत हो जाती, क्योंकि बंकर में सिर्फ एक समय का ही खाना दिया जाता था। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी तक हॉस्टल में बने बंकर में किसी तरह गुजारे। हॉस्टल से कुछ दूरी पर स्थित कॉलेज के बाहर मिसाइल गिरी। धमाके से सभी छात्र सहम गए।
कॉलेज प्रबंधन ने भी हालात खराब होता देख छात्रों से घर जाने को बोल दिया। छात्र ने बताया कि 01 मार्च को 30 भारतीय छात्रों के साथ ट्रेन पकड़ने के लिए हम लोग हॉस्टल से निकले, लेकिन कोई साधन नहीं मिला। नौ किलोमीटर तक हम लोग पैदल चले, उसी दौरान एयर स्ट्राइक शुरू हो गई और आसपास बमबारी शुरू हो गई। कई छात्रों का मनोबल टूट गया और उन्होंने बंकर में वापस जाने को बोला। लेकिन हम लोगों ने उनका मनोबल बढ़ाया और चलते रहे। रात 9:30 पर स्टेशन पहुंचे, लेकिन यहां भी केवल पहले यूक्रेन के नागरिकों को ही चढ़ने दिया गया। सबसे आखिरी में हमें ट्रेन में चढ़ने का मौका दिया गया, लेकिन केवल 27 छात्र की ट्रेन में चढ़ पाए। हमारे साथ के तीन छात्र वहीं स्टेशन पर छूट गए।
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भावुक होकर युवराज ने बताया कि लिवीव पहुंचने के बाद भी मुसीबतें खत्म नहीं हुईं और स्टेशन से बाहर निकलते ही वहां भी एयर स्ट्राइक के लिए सायरन बजने लगा। बस बुक करवाकर हम सभी वहां से पोलैंड बॉर्डर पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद सभी चीजें आसान हुईं। ऑपरेशन गंगा के तहत बॉर्डर पर मौजूद भारत सरकार के नुमाइंदों ने हमें हाथों-हाथ ले लिया। बस से हमें ऑर्ट ऑफ लिविंग आश्रम में पहुंचाया गया और खाने व सोने की अच्छी व्यवस्था की गई। वहां से रिजजू के एक होटल में ले जाया गया और उसके बाद फ्लाइट से घर आ गए। छात्र ने बताया कि भारत सरकार का ऑपरेशन गंगा छात्रों के लिए वरदान साबित हुआ है।
स्टेशन के बाहर गिरी मिसाइल, दगती तो हो जाती मौत
छात्र युवराज ने बताया कि हम सभी यूक्रेन स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान सायरन बजा तो सब सहम गए। सभी कोना पकड़ कर दुबक गए। इसी दौरान एक मिसाइल स्टेशन के मुख्य गेट पर गिरी। भगवान का शुक्र रहा कि मिसाइल दगी नहीं वरना आज मैं अपनी मां को नहीं देख पाता। इतना कहकर युवराज भावुक हो गए।
माइनस सात डिग्री तापमान पर नौ घंटे करना पड़ा इंतजार
युवराज ने बताया कि यूक्रेन में इस समय भारी बर्फबारी हो रही है। तापमान माइनस सात डिग्री सेंटीग्रेड है। हम सब जब यूक्रेन-पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचे तो वहां बहुत भीड़ थी। सभी को लाइनों में खड़ा कर दिया गया। भीषण ठंड के बीच सभी छात्र यूक्रेन बॉर्डर पर लगातार नौ घंटे तक खड़े रहे। इस दौरान कई छात्रों की तबियत भी खराब हो गई।
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