बहराइच। नशे के सौदागरों पर बनाई गई हिंदी फिल्म उड़ता पंजाब का असर इस समय नेपाल सीमा से सटे बहराइच जिले में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। जिस तरह से यहां पर स्मैक व चरस की बरामदगी हो रही है इससे साफ है कि एक बड़ा रैकेट चल रहा है। नेपाल सीमा से सटा होने के चलते तस्करों को और भी मौका मिल रहा है। हाल यह है कि जहां सीमा के आस पास गांव में खुलेआम चरस व स्मैक बिक रही है। वहीं मुख्य शहर में भी यह धंधा अपने शबाब पर है।बीते एक माह में हुई कार्रवाई पर नजर डाले तो नेपाल सीमा के पास एसएसबी व स्थानीय पुलिस ने करीब 100 किलो चरस व पांच किलो स्मैक बरामद की है। इसमें एक कार में ही 50 किलो चरस मिली थी। यह कार किसकी थी और इतनी भारी मात्रा में चरस की तस्करी करने के पीछे कौन है, पुलिस इस बात का पता नहीं लगा सकी। वहीं भारत व नेपाल के बीच चलने वाली मैत्री बस में भी दो बार भारी मात्रा में चरस बरामद हुई है। इसमें एक नेपाली महिला व पुरुष पकड़े गए थे।
इस कार्रवाई में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि नशे के सौदागर नेपाल से लेकर दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, गोवा जैस बड़े शहरों में अपना रैकेट फैलाए हुए है। नेपाल से चरस लाई जाती है जिसे बहराइच में खपाने के बाद आगे भेजा जा रहा है।
लग्जरी होटलों व हॉस्टल में सप्लाई
पुलिस व एसटीएफ से जुड़े विश्वस सूत्रों की मानें तो इस समय बड़े शहरों में युुवा चरस का सेवन काफी तेजी से कर रहे हैं। चरस की सप्लाई लग्जरी होटलों व कॉलेज हॉस्टलों में धड़ल्ले से होती है। एक पुड़िया चरस की अच्छी खासी कीमत वसूल की जाती है। चरस का नेपाल गढ़ माना जाता है। इसी के चलते नेपाल के रास्ते ही इसकी सबसे ज्यादा तस्करी होती है।
105 किलोमीटर है नेपाल की खुली सीमा
जिले से नेपाल की सीमा करीब 105 किलोमीटर तक फैली है। यहां पर सिर्फ रूपईडीहा में ही चेक पोस्ट है बाकी इलाके से कोई भी आसानी से इधर व उधर जा सकता है। एसएसबी व पुलिस के जवान यहां तैनात रहते है लेकिन इसके बावजूद तस्कर अपने कैरियर के माध्यम से कारोबार को आसानी से अंजाम देते रहते है। वहीं कतर्नियाघाट जंगल इलाके से भी भारी मात्रा में चरस के साथ लकड़ी की भी तस्करी की जाती है।