बहराइच। लू लगने पर शरीर की कार्य प्रणाली प्रभावित होती है। गंभीर स्थिति में मृत्यु भी हो सकती है। इसके प्रभाव को कम करने व इससे बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। प्यास न लगी हो तब भी पानी पिएं। खासकर बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती व हृदय रोगियों को खानपान व रहन-सहन पर अधिक ध्यान देना चाहिए।गुरुवार को विकास भवन में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने अधिकारियों व आमजन को सजग रहने की सलाह देते हुए अलर्ट जारी किया है। उन्होंने कहा कि कमजोरी, चक्कर आना, सिर दर्द, उबकाई, ज्यादा पसीना आना, मूर्छा आदि लू लगने के लक्षण हैं। इन लक्षणों के होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं। आपात स्थिति में 108 व 102 एम्बुलेंस बुला सकते हैं।
उन्होंने कहा कि लू से बचाव के लिए शरीर में पानी की कमी न होने दें। यात्रा करते समय पीने का पानी अपने साथ रखें। ओआरएस का घोल, लस्सी, चावल का पानी (माड़), नींबू-पानी, छाछ आदि का ज्यादा उपयोग करें। जल की अधिक मात्रा वाले मौसमी फल एवं सब्जियों जैसे- तरबूज, खरबूज, संतरे, अंगूर, खीरा, ककड़ी एवं सलाद पत्ता आदि का प्रयोग करें।
धूप में सिर को ढके रहें
धूप के चश्मे, छाता, टोपी व चप्पल का प्रयोग करें। जो व्यक्ति खुले में कार्य करते हैं, वह सिर, चेहरा, हाथ-पैरों को गीले कपड़ों से ढके रहें। छाते का प्रयोग करें। हमेशा हवादार स्थान पर रहें। सूर्य की सीधी रोशनी व गर्म हवा को रोकने का उचित प्रबंध करें। रात में कमरों को ठंडा करने के लिए खिड़की दरवाजा खोल दें।
बच्चों व गर्भवती का रखें विशेष ध्यान
सीएमओ डॉ. सतीश कुमार सिंह ने बताया कि एक वर्ष से कम आयु के शिशु तथा अन्य छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बाहर कार्य करने वाले व्यक्ति, ह्रदय रोगी या उच्च रक्तचाप (हाई-बीपी) से ग्रसित व्यक्ति सामान्य लोगों की तुलना में लू के लिए ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इनके बचाव पर अत्यधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
बासी भोजन व साफ्ट ड्रिंक से करें परहेज
जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि अधिक गर्मी वाले समय में विशेषकर दोपहर 12 से तीन बजे के मध्य सूर्य की रोशनी में जाने से बचें। नंगे पैर बाहर न निकलें। अधिक प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के प्रयोग से यथासंभव बचें। बासी भोजन का प्रयोग न करें। गहरे रंग के भारी व तंग कपड़े न पहनें। शराब, चाय, काफी, सॉफ्ट ड्रिंक आदि के उपयोग करने से बचें। यह शरीर में निर्जलीकरण पैदा करते हैं।