बहराइच। गांवों में स्वच्छता के लिए प्रचार-प्रसार के नाम पर करोड़ों का बंदरबांट करने के मामले में डीपीआरओ को शासन ने निलंबित कर दिया है। आरोप है कि तय रेट से काफी अधिक दर से डीपीआरओ ने संबंधित फर्म को इसका भुगतान कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2020 में तत्कालीन डीएम ने भी डीपीआरओ के खिलाफ शासन से कार्रवाई की सिफारिश की थी। लेकिन उस समय कार्रवाई न होकर अब शिकंजा कसा गया है।
इस मामले में डीपीआरओ के खिलाफ पुलिस केस भी दर्ज है। उल्लेखनीय है कि यह मामला 8 दिसंबर 2022 को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद इसकी जांच शासन स्तर पर तेज हुई थी। बहराइच जिले में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए गांवों में लगाई जाने वाली होर्डिंग्स के नाम पर हुए करोड़ों के घालमेल का मामला एक बार फिर सामने गया है।
4 जुलाई वर्ष 2020 को जिले के तत्कालीन डीएम शंभू कुमार ने जिले में तैनात डीपीआरओ उमाकांत पांडेय के खिलाफ मिली शिकायत की जांच कराई थी। जांच में आरोपों की पुष्टि के बाद तत्कालीन डीएम ने निदेशक पंचायती राज को तैनात डीपीआरओ उमाकांत पांडेय के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति के साथ आरोप पत्र भी भेजा गया था। इसमें बताया गया कि जिले में तैनाती होने के दौरान डीपीआरओ ने प्रचार-प्रसार पर खर्च हुई सरकारी धनराशि के बंदरबांट कर गड़बड़ी की है।
मानकों की उड़ाई गई धज्जियां
ग्राम पंचायतों में जो होर्डिंग्स लगी उनका साइज भी मानक के विपरीत था। इसके साथ ही 1940 रुपये के इतर प्रति होर्डिग्स पांच सौ रुपया भाड़ा जोड़ कर संबंधित फर्म को 9680 रुपये की दर से भुगतान किया गया। ऐसे में करीब 5150 होर्डिंग्स 1045 गांवों में लगाने के नाम पर करोडों का अनियमित भुगतान सामने आया था। सूत्रों की माने तो होर्डिंग्स लगाने का काम आईईसी मद से कराने का निर्देश था लेकिन डीपीआरओ ने चतुर्थ राज्य वित्त व चौदहवें वित्त राशि की धनराशि से प्रचार के इस काम को कराया। जांच में सामने आया कि नोटशीट पर शासनादेश का हवाला देने के बावजूद वास्तविक तथ्यों को छुपाया गया।
कारण बताओ नोटिस का नहीं दिया जवाब
होर्डिंग्स मामले की जांच तत्कालीन डीएम ने सीडीओ के स्तर से 22 जून 2020 को कमेटी बनाकर जांच कराई। त्रिस्तरीय टीम ने जांच रिपोर्ट 17 जून 2020 को डीएम को सौंप दी थी। इसके बाद डीएम ने डीपीआरओ उमाकांत पांडेय को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा था। इसका जवाब डीपीआरओ की तरफ से नहीं दिया गया।
वीडीओ से दबाव बनाकर लगवाई मनमानी रिपोर्टये भी आरोप है कि डीपीआरओ उमाकांत पांडेय ने मिहींपुरवा, रिसिया, शिवपुर व बलहा विकास खंड के सहायक विकास अधिकारियों पर दबाव बनाते हुए अपने पक्ष में रिपोर्ट बनवाई थी। 30 जून 2020 को इस मामले में डीएम को आख्या दी थी। इसके बाद इस पूरे मामले में अनियमितता होने की बात भी सामने आई थी।
पंचायती राज विभाग के अनु सचिव ने जारी किया निलंबन आदेशप्रदेश सरकार पंचायती राज विभाग के अनु सचिव अशोक कुमार राम ने 13 मई को बहराइच के डीपीआरओ उमाकांत पांडेय के निलंबन का आदेश जारी किया है। इनके स्तर से जारी निलंबन आदेेश में लिखा है कि बहराइच जिले में ग्राम पंचायतों में होर्डिंग्स लगाने में उच्चाधिकारियों को गुमराह कर अनुमोदित दर से अधिक दर पर भुगतान किया गया। साथ ही शौचालय निर्माण के 80 करोड़ रुपये खाते में होने के बाद भी काम नहीं हुुआ। इसके बाद भी डीपीआरओ ने दोषी ग्राम प्रधान व सचिवों पर कार्रवाई नहीं की। मामले की जांच उप निदेशक पंचायती राज मुख्यालय एसएन सिंह को जांच सौंपी गई है। डीपीआरओ उमाकांत पांडेय को पंचायती राज निदेशालय में संबद्व किया गया है।