बहराइच। जिले के अन्नदाताओं पर कुदरत का कहर जारी है। बीते दिनों हुई बारिश के जख्मों से अभी किसान उबर भी नहीं पाए थे कि शनिवार की सुबह हुई जोरदार बारिश ने एक बार फिर किसानों को झटका दिया। वहीं शनिवार को बारिश के साथ 20 से 25 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चली जिससे किसानों की फसलें गिर गईं। जिले के किसानों पर बीते एक सप्ताह से बारिश का कहर देखने को मिल रहा है।
बीते दिनों हुई झमाझम बारिश से जहां किसानों की लगभग 15 प्रतिशत गेहूं की खराब हो गयी थी तो वहीं शनिवार की सुबह एक बार फिर मौसम ने अचानक अपना रुख बदला। अन्नदाता जब तक कुछ समझ पाते आसमान को काली छटाओं ने अपने आगोश में ले लिया और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरु हो गयी। बारिश के चलते नानपारा, मिहींपुरवा, महसी, कैसरगंज, सदर व पयागपुर तहसील के हजारों किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। बारिश के साथ चली तेज हवाओं ने किसानों द्वारा मेहनत से उगाई गेहूं की फसल को चंद मिनटों में बिछा दिया। तेज हवाओं व बारिश के थपेड़ों ने गेहूं के साथ-साथ मसूर, सरसों सब्जी की फसलों को भी नुकसान पहुंचाया। बारिश बंद होने के बाद खेत पहुंचे अधिकतर किसानों को मायूसी हाथ लगी। बारिश के चलते महसी तहसील के सधुवापुर निवासी संतकुमार मौर्य, अमरनाथ तिवारी, संतोष गुप्ता, रामअधार तिवारी, रामकरन तिवारी, सहारे मौर्य, बाबागंज के भवनियापुर निवासी बृजेश सिंह, कैसरगंज के सुतौली निवासी स्वामी दयाल मौर्य, राजू वर्मा आदि समेत हजारों किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाया है।
जिला कृषि अधिकारी सतीश पांडेय ने बताया कि कृषि टीमें नुकसान के आंकलन में जुट गई है। अब तक लगभग 10 से 15 प्रतिशत नुकसान का आकलन किया गया है। जिले के लगभग एक लाख किसानों का फसल बीमा है। सभी बीमित किसानों से अपील है कि 72 घंटे के अंदर टोल फ्री नंबर 18008896868 पर सूचना दें। सदर तहसील के किसान 8922860066, नानपारा के 6386881089, पयागपुर के 9792621819, कैसरगंज के 8874087756, मिहींपुरवा के 7985250025 और महसी के किसान 7235836662 पर नुकसान की सूचना दे सकते हैं।
जिला कृषि अधिकारी सतीश पांडेय ने बताया कि अगर जिले में 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होता है, तो बीमित किसानों के अलावा जिन किसानों का नुकसान हुआ है, उन्हें आपदा राहत कोष से मदद दी जाएगी। लेकिन जिले में अभी ऐसे कोई नुकसान की आशंका नहीं दिख रही है। तेज हवाओं से नुकसान हुआ है, उसकी जानकारी टीमें कर रही हैं।