नेपाल के दो वन्य जीव तस्करों को रविवार सुबह नोमेंसलैंड से एक तेंदुए की खाल के साथ दबोचा गया। यह खाल दांत के साथ एसएसबी के हाथ लगी है। नेपाली तस्कर खाल को गोरखपुर के सोनौली से तस्करी कर नेपाल ले जा रहे थे। वहां से इसे चीन भेजना था।
बरामद खाल को सीज कर आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। दांत के साथ खाल की कीमत अंर्तराष्ट्रीय बाजार में लगभग दो करोड़ बताई जा रही है। एसएसबी के डिप्टी कमांडेट वीसी जोशी ने बताया कि शनिवार रात को कुछ शातिर वन्य जीव तस्करों के रुपईडीहा सीमा से नेपाल जाने की सूचना मिली थी।
इस पर बहराइच वन प्रभाग को अलर्ट करते हुए गश्त बढ़ा दी गई। रविवार सुबह वन विभाग व एसएसबी के जवान सीमा पर गश्त कर रहे थे। तभी नोमेंसलैंड के पिलर संख्या 30/1 के पास दो व्यक्ति नेपाल की ओर जाते दिखे। जवानों ने उन्हे रुकने का इशारा किया तो सभी ने भागने की कोशिश की।
इस पर घेराबंदी कर दोनों को दबोच लिया गया। युवकों की तलाशी ली गई तो उसके पास से तेंदुए की खाल बरामद हुई। खाल में तेंदुए के 27 दांत भी लगे थे। बरामद खाल लगभग दो मीटर लंबी है। पकड़े गए युवकों की पहचान निर्मल विश्वकर्मा निवासी चंगेजी गढी जिला तिंगजा नेपाल और बकत विश्वकर्मा निवासी टोली जिला आक्षाम नेपाल के रूप में हुई है।
पकड़े गए दोनों युवकों ने बताया कि उन्होंने गोरखपुर के पास सोनौली से तेंदुए की खाल एक व्यक्ति से ली थी। इस खाल को रुपईडीहा के रास्ते नेपाल से चीन ले जाया जाना था। डिप्टी कमांडेट ने बताया कि बरामद तेंदुए की खाल को सीज कर दोनों आरोपियों को वन्य जीव तस्करी के मामले में जेल भेज दिया गया है।
एसएसबी के डिप्टी कमांडेट वीसी जोशी ने बताया कि पहली बार तेंदुए की खाल मय दांत के साथ बरामद हुई है। खाल में दांत लगे होने से इसकी कीमत करोड़ों में पहुंच जाती है। ऐसी खालों की विदेशों में ज्यादा मांग रहती है। खाल की लंबाई लगभग दो मीटर के आसपास है। तेंदुए और बाघ की हड्डियों का प्रयोग शक्तिवर्धक दवाओं के रूप मेें भी किया जाता है।
पकड़े गए दोनों नेपाली आरोपियों नें बरामद खाल को चीते की बताया था। इसके कारण अधिकारी उहापोह की स्थिति में रहे क्योंकि वर्ष 1952 में चीता भारत से विलुप्त हो चुका है। डीएफओ आशीष तिवारी और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बरामद खाल के तेंदुए के होने की पुष्टि की।