बहराइच। जरवल नगर पंचायत के विकास कार्यों में सवा करोड़ से अधिक के घोटाले का खुलासा हुआ है। स्ट्रीट लाइट लगवाने में जहां 70 लाख से अधिक का घपला है, वहीं झाड़ू, गैंती, फावड़ा, ठेला की खरीद में भी हेराफेरी की गई है।
बाजार मूल्य से अधिक के बिल वाउचर लगाए गए हैं। इन सबका खुलासा क्षेत्र के लोगों की शिकायत से हुआ है। इस मामले में शासन के नगर विकास अनुभाग के अनुसचिव ने जिलाधिकारी को जांच सौंपी है। 15 दिन में आख्या भी तलब की है। शासन के इस कदम से हड़कंप मचा है।
जरवल नगर पंचायत के विकास कार्यों पर आए दिन उंगलियां उठती रहती हैं। कभी सभासद प्रदर्शन करते हैं तो कभी विकास कार्यों में धांधली बरतने का आरोप लगता है।
अब विकास कार्यों के अलग-अलग मदों में घोटाले का आरोप लगा है। इसका खुलासा कस्बे के बाजदारी मोहल्ला निवासी शमीम अहमद समेत अन्य लोगों द्वारा शासन में की गई शिकायत से हुआ है।
इन लोगों ने किसी माध्यम से सामान की खरीदारी का बिल वाउचर और कोटेशन निकलवाया। इसके बाद जो आंकड़े सामने आए वो चौंकाने वाले हैं।
वर्ष 2013-14 में राज्य वित्त आयोग के मद से आठ अदद सोलर स्ट्रीट लाइटों की खरीद की गई थी। प्रति स्ट्रीट लाइट एक लाख 26 हजार का भुगतान किया गया है।
इसके तहत एक करोड़ 80 हजार रुपये का व्यय हुआ, जबकि कोटेशन में प्रति स्ट्रीट लाइट की दर 38 हजार रुपये अंकित है। इसी तरह नया सवेरा योजना के तहत सत्र 2013-14 में 30 सोलर लाइटें खरीदी गईं।
इन सोलर लाइटों की खरीद पर भी पूर्व खरीदी गई सोलर लाइटों के अंदाज में भुगतान किया गया। 26 लाख 40 हजार की हेराफेरी की गई।
वहीं 13वें वित्त आयोग के धनराशि से वर्ष 2012-13 में 25 क्विंटल नारियल झाड़ू की आपूर्ति की गई। 6493 रुपये प्रति क्विंटल की दर से झाड़ू क्रय किया गया है, जबकि बाजार मूल्य 3300 रुपये प्रति क्विंटल है। झाड़ू खरीद में भी 79 हजार से अधिक के हेरफेर का मामला सामने आ रहा है।
इतना ही नहीं, केडब्ल्यू मार्का 20 अदद रिक्शा खरीद में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई। साथ ही फावड़ा, गैंती, कैमरा, मैनुअल स्टेबलाइजर की खरीद में भी धांधली बरती गई। सवा करोड़ से अधिक के घोटाले का खुलासा हुआ है।
शिकायतकर्ताओं ने इन वाउचरों और कोटेशन को शासन को भेजा। इसके बाद नगर विकास अनुभाग के अनुसचिव बिहारी लाल ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर जांच के निर्देश दिए हैं। 15 दिन में जांच आख्या तलब की है।
पुरानी मशीनों को रंग रोगन कर दिखाया नया
13वें वित्त आयोग के धनराशि से दो फॉगिंग मशीनें वर्ष 2012-13 में खरीदी गई थीं। शिकायकर्ताओं का कहना है कि इन मशीनों पर दो लाख 35 हजार 115 रुपये व्यय हुए, जबकि मशीनें पुरानी थीं। सिर्फ रंग-रोगन किया गया था। कार्यालयों में मशीनों को लाए जाने पर उनका पेंट छूट रहा था।
बिना बोर्ड प्रस्ताव के हुई अधिकतर खरीद
नगर विकास अनुभाग उत्तर प्रदेश के निदेशक और नगर विकास मंत्री को जो पत्र भेजा गया है, उसमें यह भी दर्शाया गया है कि बिना बोर्ड प्रस्ताव के अधिकांश खरीद मनमाने तरीके से की गई है। जो नगर पालिका अधिनियम के भी विपरीत है।