प्रदेश सरकार समाजवादी दिवस के माध्यम से उपलब्धियों का गुणगान कर रही है। विकास कार्यों के दावे किये जा रहे हैं। लेकिन विकास का कार्य किस कदर घोटालों की भेंट चढ़ रहा है, इसकी बानगी बहराइच में दिख रही है। रिसिया विकासखंड का गुरुदत्तपुरवा गांव जनेश्वर मिश्र योजना के तहत चयनित हुआ था।
गांव में आवागमन के लिए एक किलोमीटर मार्ग और नाली का निर्माण होना है। लेकिन बिना निर्माण के रातोंरात निर्माण कार्य का शिलालेख लगा दिया गया। शिलालेख में मुख्यमंत्री की ओर से शिलान्यास का भी उल्लेख है। साथ इसमें बहराइच नहीं बल्कि श्रावस्ती के डीएम को प्रशासक दिखाया गया है। जबकि प्रशासक एसडीएम सदर बहराइच हैं।
निर्माण कार्य का धन कहां गया, यह भी पता नहीं। अधिकारी इस मामले में किनारा कस रहे हैं। गांव के विकास कार्य घोटालों की जद में हैं। हालात यह हैं कि बिना कार्य कराये धन का बंदरबांट हो रहा है। कुछ यही तस्वीर बहराइच के रिसिया विकासखंड में दिख रही है। रिसिया ब्लॉक मुख्यालय से तीन किलोमीटर की दूरी पर गुरुदत्तपुरवा गांव है।
इस गांव को आसाम रोड से जोड़ने के लिए एक किलोमीटर सीसी सड़क मार्ग और नाली के निर्माण का प्रस्ताव मंडी समिति रिसिया द्वारा वर्ष 2014 में बनाया गया था। लेकिन अब तक मार्ग का निर्माण नहीं हुआ, लेकिन रातोंरात संपर्क मार्ग के निर्माण और नाली निर्माण के शिलालेख लगा दिया गया है।
इस शिलालेख पर मंडी समिति रिसिया को श्रावस्ती जिले का हिस्सा दिखाया गया है, जिसके तहत जनेश्वर मिश्र ग्राम गुरुदत्तपुरवा में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा 22 दिसंबर 2015 के शिलान्यास की तिथि अंकित है।
इस शिलालेख पर बहराइच के जिलाधिकारी के बजाये श्रावस्ती के जिलाधिकारी/प्रशासक मंडी समिति रिसिया के रूप में आईएएस राघवेंद्र विक्रम सिंह और मंडी निदेशक डॉ. अनूप यादव के नाम का अंकन है। ऐसे में मुख्यमंत्री कब आए, कब शिलान्यास हुआ, इसकी जानकारी गांव के लोगों को भी नहीं है। सभी प्रशासन के इस खेल से हतप्रभ हैं।