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पोस्टमैन की गोली मारकर हत्या

Wed, 30 Mar 2016 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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बिलखते परिवारीजन - फोटो : अमर उजाला
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बालासरांय गांव निवासी पोस्टमैन व पूर्व प्रधान के पुत्र की मंगलवार देर रात गांव के निकट गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनके साथ मौजूद चचेरे भाई ने भागकर जान बचाई। दोनों भाई पड़ोस के ग्राम शुक्लनपुरवा से  रामलीला का मंचन देख कर घर लौट रहे थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
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इस मामले में मृतक के भाई की तहरीर पर हत्या का केस दर्ज किया गया है। हत्या का कारण चुनावी रंजिश माना जा रहा है। हालांकि अभी तक परिवारीजन कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। हरदी थाना अंतर्गत बालासरांय गांव निवासी सुरेश प्रसाद मौर्य (45) पुत्र भगौती प्रसाद रमपुरवा में स्थित डाकघर में पोस्टमैन के पद पर तैनात थे।

उनके पिता एक बार व मां दो बार ग्राम प्रधान रह चुके हैं। इस बार सुरेश का सहयोगी ग्राम प्रधान के पद पर चुना गया है। जिसके चलते चुनाव के समय से ही सुरेश की गांव के कुछ लोगों से रंजिश चल रही थी। इस पर विपक्षियों ने कई बार देख लेने की धमकी भी दी थी। मंगलवार को बालासरांय गांव से सटे शुक्लनपुरवा गांव में रामलीला का मंचन शुरू हुआ।
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इसमें पोस्टमैन सुरेश भी रात 11 बजे के आसपास अपने चचेरे भाई बासुदेव के साथ रामलीला का मंचन देखने शुक्लनपुरवा गांव गए। इसके बाद रात एक बजे के आसपास बाइक से गांव के लिए रवाना हुए। बाइक सुरेश स्वयं चला रहे थे। जबकि बासुदेव पीछे बैठे थे।

बाइक सवार दोनों भाई जब शुक्लनपुरवा-बालासरांय मार्ग पर अपने गांव से 500 मीटर पहले भंगहर पुल के पास पहुंचे। तभी सड़क के दोनों ओर छिपे आधा दर्जन की संख्या में लोग सामने आ गए। सभी के हाथों में कट्टा व धारदार हथियार लिये हुए थे। इस पर सुरेश ने बाइक मोड़कर पीछे भागने की कोशिश की, लेकिन तभी असंतुलित होकर बाइक गिर गई।

तभी हमलावरों ने सुरेश पर निशाना साधकर फायर कर दिया। गोली उनके पीठ में लगी। उनके भाई बासुदेव ने सुरेश को सहारा देकर भागने की कोशिश की, लेकिन सुरेश ने अपने भाई बासुदेव को दूसरे दिशा में भगाया। तभी हमलावरों ने ताबड़तोड़ और दो चक्र फायरिंग कर दी।

जिससे सुरेश मौके पर ही गिर गए। इसके बाद जाते समय हमलावरों ने उनके सिर पर भी गोली दागी। हमलावर सुरेश की डिक्की से पंचायत भवन की चाबी, डाकघर के कागजात, उनके पास मौजूद नकदी, मोबाइल व अन्य सामान भी लेकर चले गए।

बासुदेव ने गांव पहुंचकर शोर मचाया। गांव के लोग लाठी-डंडा लेकर मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक हमलावर भाग चुके थे। वहीं सुरेश की भी मौत हो चुकी थी। तत्काल थाने पर सूचना दी गई, लेकिन पुलिस दो घंटे बाद बुधवार भोर में मौके पर पहुंची।

सूचना पाकर एसपी सालिकराम वर्मा, एएसपी दिनेश त्रिपाठी, सीओ अजेय शर्मा के साथ ही बौंडी और रामगांव थाने की पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची। सुबह शव का पंचनामा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। इस दौरान क्षेत्र के लोगों की भारी भीड़ जमा रही। एसपी सालिकराम वर्मा ने बताया कि मृतक के भाई रामनिवास मौर्य की तहरीर पर हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू की गई है।

आना हो तो रात में आओ, सुबह क्या करोगे
अपनी आंखों के सामने भाई पर हमला देख बदहवास भागकर गांव पहुंचे चचेरे भाई बासुदेव ने फफकते हुए बताया कि रात को उसका भाई सुरेश रामलीला का मंचन देखने नहीं जाना चाहता था। चंदा देना था, इसके लिए आयोजकों से सुबह आने की बात कही थी। लेकिन रामलीला का आयोजन करने वाले एक व्यक्ति ने रात में ही दबाव डालकर सुरेश को शुक्लनपुरवा गांव बुलवाया। यह भी कहा कि आना है तो रात में कार्यक्रम के समय आओ, सुबह क्या करोगे। सभी उस घड़ी को कोस रहे हैं।

गठित की गई तीन टीमें
एसपी सालिकराम वर्मा ने बताया कि डाग स्क्वॉयड की मदद से भोर में ही घटनास्थल को खंगाला गया है। कुछ क्लू हाथ लगे हैं। मामले का पर्दाफाश करने के लिए सीओ, एसओ और एसओजी की टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

परिवार के लोगों का रो-रो कर बुरा हाल
सुरेश के परिवार में मां-बाप के अलावा पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है। सभी का रो-रो कर बुरा हाल है। पछाड़े खा-खाकर गिर रहे हैं। गांव के लोग ढंाढस बंधाने पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी आंखों से भी आंसू थम नहीं रहे हैं। दोपहर में लाश जब घर पहुंची तो लोगों की भारी भीड़ जमा रही।

काफी रसूखदार लोगों में शुमार होते थे सुरेश
सुरेश वैसे तो डाकघर में पोस्टमैन के पद पर तैनात थे। लेकिन उनकी गिनती क्षेत्र में काफी रसूखदार के रूप में होती थी। पिता भगौती प्रसाद वर्ष 2000 में प्रधान चुने गए। इसके बाद मां रामसंवारी वर्ष 2005 और 2010 में दो बार प्रधान चुनी गईं। इस बार सीट आरक्षित होने के चलते सुरेश ने अपने सहयोगी भगवानदीन को चुनाव लड़ाया था। वह भी प्रधानी का चुनाव जीत गए। इसके बाद से ही विपक्षियों से खुन्नस अधिक बढ़ी थी।
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