बहराइच। जिला अस्पताल बहराइच में मरीजों को घटिया खाद्य सामग्री परोसी जा रही है। इसका खुलासा हुआ है गोरखपुर की विधि प्रयोगशाला में, जहां एक साल पहले पांच सैंपलों को जांच के लिए भेजा गया था।
जांच में अरहर और मसूर की दाल मानकों पर खरी नहीं उतरी है। दोनों दाल में मानक से अधिक घुन मिले हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिम्मेदार ठेकेदार पर सुसंगत धाराओं में एडीएम कोर्ट में केस ठोंक दिया है। अब कोर्ट जुर्माने की धनराशि तय करेगी। इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
जन शिकायतों के आधार पर अक्तूबर 2014 में तत्कालीन कमिश्नर आरपी अरोड़ा ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था, जिसमें मरीजों को परोसे जाने वाला खाना मानकों के विपरीत व गुणवत्ताविहीन मिला था।
इस पर उन्होंने तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट जयशंकर त्रिपाठी को जांच सौंपी थी। नगर मजिस्ट्रेट ने खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ भंडार घर में रखी खाद्य सामग्री व रसोई घर में पका खाना दोनों की जांच की थी।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने चावल, अरहर, मसूर, तेल और आटे का नमूना लेकर गोरखपुर विधि प्रयोगशाला भाजी थी।
हाल ही में जो रिपोर्ट सामने आई है, वह चौंकाने वाली है। आटा, चावल व तेल मानकों पर खरे उतरे हैं लेकिन अरहर व मसूर की दाल लैब टेस्ट में फेल निकली है।
खाद्य विभाग के मुताबिक खाद्य सामग्री में पांच फीसदी घुन का पाया जाना ठीक है लेकिन अरहर दाल में 12 फीसदी से अधिक व मसूर की दाल में 11.6 फीसदी घुन मिले हैं। 12 फीसदी टूटी व 88 फीसदी दाल साबूत पाई गई है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी संदीप चौरसिया ने बताया कि विधि प्रयोगशाला की जांच में अरहर व मसूर की दाल मानकों के विपरीत मिली है। इस पर विभाग ने खाद्य आपूर्तिकर्ता फर्म मंशाद अहमद के ठेकेदार फैसल खान को नोटिस भेजा है।
ठेकेदार को एक माह के भीतर जवाब दाखिल करने का समय दिया गया है। इसके अलावा विभाग ने मानकों के विपरीत मिली अरहर दाल के लिए अपर जिलाधिकारी की कोर्ट पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत केस भी दर्ज करवाया है।
संदीप चौरसिया ने बताया कि मसूर की दाल के बाबत भी जल्द ही एडीएम कोर्ट पर केस दर्ज करवाने की तैयारी चल रही है। एक सप्ताह के भीतर दूसरा केस भी दर्ज हो जाएगा। अब कोर्ट जुर्माने की राशि तय करेगी, फिर वसूली का नोटिस जारी किया जाएगा।
फार्मासिस्ट और बाल रोग विशेषज्ञ भी आरोपी
तत्कालीन मंडलायुक्त आरपी अरोड़ा ने पूरे मामले को स्वास्थ्य महानिदेशक को अवगत कराया था। डीजी ने इस प्रकरण की जांच अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण देवीपाटन मंडल डॉ उमाकांत वर्मा को सौंपी है।
इस मामले में ठेकेदार फैसल खान के अलावा अस्पताल के फार्मासिस्ट डॉ आरबी सिंह व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ केके वर्मा को भी आरोपी बनाया गया है। गत 19 अगस्त को जांच के लिए बहराइच आए एडी ने गत सात वर्षों के अभिलेखों की जांच की तो कई खुलासे हुए।
वर्ष 2008 से अब तक अभिलेख में रोटी, सब्जी, दाल व चावल की इंट्री की गई है लेकिन छह साल से चावल नहीं पकाया गया है। जबकि गाइडलाइन के मुताबिक मरीजों को मीनू के मुताबिक खिचड़ी मिलनी चाहिए।
प्रतिदिन औसतन सौ मरीजों को भोजन दिया जाता है लेकिन वर्ष 2014 में अगस्त से लेकर अक्तूबर तक की आर्डर बुक गायब है। एडी ने टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए थे।