वर्षों पहले बंद हो चुकी एक फाइनेंस कंपनी के डायरेक्टर (मालिक ) ने मंगलवार तड़के ट्रेन के आगे कूद आत्महत्या कर ली। गबन के आरोप में जेल जा चुके डायरेक्टर पर अभी भी निवेशकों के रूपये बकाया थे। वह तगादा कर रहे थे।
आर्थिक तंगी की स्थिति में डायरेक्टर से परिवार ने भी किनारा कर लिया था। मंगलवार सुबह रेलवे ट्रैक पर मिले शव को जीआरपी ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। शहर में मोहल्ला कानूनगोपुरा दक्षिणी निवासी जितेंद्र प्रताप सिंह (56) पूर्व में लाइंस हाउसिंग नाम से फाइनेंस कंपनी का संचालन करता था। उसका कार्यालय गोंडा व लखनऊ में भी था।
जानकार बताते हैं कि कंपनी में ढाई हजार से अधिक लोगों ने निवेश किया था लेकिन वर्ष 1992-93 में कई निवेशकों ने गबन का आरोप लगाते हुए लखनऊ में जितेंद्र सिंह पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया। इस केस में जितेंद्र को जेल जाना पड़ा। इसके बाद कंपनी बंद हो गई। उसके हिस्सेदारों ने किनारा कर लिया।
इसके बाद जितेंद्र सिंह के दो बेटों ने गाजियाबाद में निजी सेक्टर नौकरी कर ली। परिवार के अन्य लोगों ने किनारा कर लिया। कुछ निवेशक अभी भी तगादा कर रहे थे। आर्थिक तंगी से गुजर रहा जितेंद्र कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान था। पड़ोसी बताते हैं कि सोमवार रात वह घर से निकला लेकिन देर रात तक वापस नहीं आया।
सुबह गोंडा-मैलानी प्रखंड के मोहम्मदा नाला के निकट रेलवे ट्रैक पर जितेंद्र का शव मिला। दोनों पैर कटे हुए थे। जीआरपी एसओ रफी आलम ने बताया कि मृतक की शिनाख्त उसके भाइयों व परिचितों ने की है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। जेब से 40 रुपये बरामद हुए हैं। पुलिस के साथ परिजन भी जितेंद्र द्वारा आत्महत्या करने की बात कह रहे हैं।