नेपाली हाथी जंगल से सटे ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बने हैं। हाथियों के एक झुंड ने रात में चार गांवों में उत्पात मचाया। गन्ना व धान की लगभग 80 बीघा फसल राैंद डाली। सूचना के बावजूद वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। पूरी रात ग्रामीण हाका लगाने के साथ पटाखे दागते रहे।
हाथियों के झुंड ने रविवार रात कतर्नियाघाट व निशानगाड़ा रेंज के निकट खेतों में उत्पात मचाया। जमुनिहा थारूपुरवा, लोहरा कारीकोट, मटेही व बर्दिया गांव के निकट हाथियों ने धान व गन्ने की फसल को रौंद डाला। इन गांवों के निकट लगी गन्ने की करीब 60 फीसदी फसल पूरी तरह चौपट हो गई है।
लोहरा व जमुनिहा गांव निवासी दीनदयाल, लालबहादुर, शिवकुमार, बाउर, भीखू, कल्लू आदि ने बताया कि रविवार रात नौ बजे के आसपास हाथियों के झुंड की चिंघाड़ सुनाई पड़ी। लगा कि हाथी जंगल में है लेकिन गांव से समूह में निकलकर जब देखा तो तो हाथियों का झुंड खेत में था। इस पर हाका लगाते हुए मशाल जलाए गए।
हाथियों को भगाने के लिए पटाखे दागे। इसके बावजूद चार गांवों के बीच खेतों में झुंड मडराता रहा। हाथियों ने 80 बीघे से अधिक गन्ने व धान की फसल पूरी तरह चौपट कर डाली। ग्रामीणों का कहना है कि रात में कतर्नियाघाट और निशानगाड़ा रेंज को सूचना भी दी गई लेकिन वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचे। गांव के लोग हाथियों के झुंड के चलते अपने सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। सभी का कहना है कि वन विभाग चुप्पी साधे हुए है। ऐसे में कभी भी झुंड गांव में हमला कर सकता है।