व्यापं घोटाले में संलिप्त चिकित्सक के घर सीबीआई का छापा

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Lucknow Bureau

बहराइच/उर्रा। मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले में संलिप्त उर्रा निवासी चिकित्सक के घर बुधवार देर शाम को सीबीआई की टीम ने छापा मारा। घर की तलाश ली, लेकिन चिकित्सक की सिर्फ मां मिली। उनका बयान दर्ज करने के बाद सीबीआई की टीम ने गांव के लोगों से पूछताछ की। इस दौरान चिकित्सक की मां ने बेटे से फोन पर बात करवाई। सीबीआई के अधिकारियों ने आरोपी चिकित्सक को पूछताछ के लिए लखनऊ के कृष्णानगर थाने में तलब किया है। सीबीआई की टीम के पहुंचने से हड़कंप की स्थिति रही। मोतीपुर थाना अंतर्गत उर्रा गांव निवासी चिकित्सक वीरेंद्र कुमार मौर्य मध्यप्रदेश के व्यापम घोटाले के आरोपी हैं। उसके ऊपर मध्यप्रदेश के भोपाल में एमपीएमटी परीक्षा में धांधली करवाने के आरोप में 120 बी, 419, 467, 420, 471 और एमपीआर एक्ट के तहत केस दर्ज है। घोटाले की जांच शुरुआती दौर में भोपाल एटीएस को मिली थी। चार मई 2015 को पहली बार भोपाल पुलिस उर्रा आई थी। लेकिन चिकित्सक घर पर नहीं मिला था। इसके बाद पांच जून 2015 व 10 अगस्त 2016 को पुन: मध्यप्रदेश एटीएस ने छापेमारी की। लेकिन चिकित्सक हाथ नहीं लगा। नवंबर 2016 में जांच सीबीआई को सौंप दी गई। बुधवार देर शाम को पहली बार सीबीआई टीम भोपाल सीबीआई शाखा के इंस्पेक्टर मनोज त्रिपाठी की अगुवाई में बहराइच पहुंची। मोतीपुर थाने में संपर्क साधने के बाद स्थानीय पुलिस के साथ सीबीआई टीम ने गांव में छापेमारी की। लेकिन घर पर चिकित्सक वीरेंद्र मौजूद नहीं मिला। सिर्फ उसकी मां बसंती देवी मौजूद मिलीं। उनसे आधे घंटे तक सीबीआई की टीम ने पूछताछ की तो मां भी बेटे के तैनाती स्थल के बारे में नहीं बता सकी। इस दौरान गांव के लोगों को बुलवाकर टीम ने उनका बयान दर्ज किया। तभी मां ने सीबीआई टीम को एक नंबर देकर बेटे से बात करने को कहा। मां बसंती के द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर सीबीआई इंस्पेक्टर मनोज त्रिपाठी ने संपर्क साधा तो व्यापम घोटाले में संलिप्त वीरेंद्र से बात हुई। उसने बताया कि वह रायबरेली जिले के सतांव स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात है। बातचीत के दौरान सीबीआई टीम ने पूछताछ के लिए आरोपी चिकित्सक वीरेंद्र को लखनऊ के कृष्णानगर थाने पर तलब किया है। आरोपी चिकित्सक बोला, बन चुका हूं सरकारी गवाह, करोगे गिरफ्तारसीबीआई के इंस्पेक्टर मनोज त्रिपाठी ने बताया कि फोन पर बातचीत के दौरान आरोपी चिकित्सक वीरेंद्र ने अपने सरकारी गवाह बनने की बात कही। यह भी कहा कि सरकारी गवाह होने के चलते गिरफ्तार नहीं कर सकते। इस पर चिकित्सक और इंस्पेक्टर के बीच झड़प भी हुई। इंस्पेक्टर ने कहा कि आरोपी चिकित्सक लखनऊ बुलाया गया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई करेंगे। पत्नी बाराबंकी हसील में है अधिकारी, फोन पर हुई बातसीबीआई इंस्पेक्टर मनोज ने बताया कि गांव के लोगों से पता चला कि आरोपी चिकित्सक वीरेंद्र की पत्नी बाराबंकी में तहसील में अधिकारी के पद पर तैनात है। मजिस्ट्रेट का दर्जा है। ग्रामीणों के बयान में इसकी जानकारी होने के बाद टीम ने पत्नी प्रज्ञा से फोन कर पर बातचीत कर उसका बयान दर्ज किया। पुलिस रख रही नजरसीबीआई टीम आरोपी चिकित्सक वीरेंद्र की तलाश में आई थी। उनके साथ कांस्टेबिल शैलेंद्र नाथ पांडेय व चंद्रशेखर को छापेमारी के लिए भेजा गया था। लेकिन चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। उसके घर पर नजर रखी जा रही है। -हरि सिंह, मोतीपुर थानाध्यक्ष
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