बहराइच। 11 साल से जमीनी मामले को लेकर अधिकारियों के सामने चक्कर लगा रहे मां-बेटे सोमवार दोपहर बाद डीएम के चैंबर में पहुंचे। यहां पर डीएम के सामने प्रार्थना पत्र देने के बाद बेटे ने मौके पर ही सल्फास की गोलियां खा ली। कहा कि 11 साल से चक्कर लगा रहे हैं। अब तक न्याय नहीं मिला है। नानपारा तहसीलदार विपक्षियों का पक्ष लेते हुए न्याय देने में रोड़े अटका रहे हैं। सल्फास खाने के बाद युवक की हालत गंभीर होते देख जिलाधिकारी ने तत्काल युवक को जिला अस्पताल पहुंचाकर भर्ती कराया। साथ ही मामले के जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना से हड़कंप की स्थिति रही।
नानपारा तहसील अंतर्गत कोटवा गांव निवासी योगेंद्र कुमार सोनकर उर्फ मुकेश सोमवार दोपहर बाद अपनी मां शांती देवी पत्नी स्वर्गीय रामकुमार के साथ कलेक्ट्रेट स्थित जिलाधिकारी अजयदीप सिंह के कार्यालय पहुंचा। अन्य पीड़ितों की तरह उसने भी मां के साथ डीएम के सामने पहुंचकर फरियाद की। कहा कि सितंबर 2006 में उसकी कृषि योग्य भूमि पर मेड़बंदी की गई। जिसे विपक्षी मेवालाल व लक्ष्मीनरायन ने तोड़कर कब्जा कर लिया। विवाद चलता रहा। 2013 में पिता की मृत्यु के बाद योगेंद्र ने पैरवी तेज की। योगेंद्र का कहना है कि एसडीएम नानपारा ने हदबरारी के आदेश दिए। राजस्व टीम ने उस समय मेड़बंदी करवाई। लेकिन पुन: विपक्षियों ने मेड़ तोड़कर छप्पर रख लिया। इसके बाद आवासीय दायरा निरंतर बढ़ाते गए। जिसके बाद योगेंद्र ने जिला स्तर पर पैरवी शुरू की। इस दौरान अधिकारी बदलते रहे। हदबरारी के आदेश होते रहे। लेकिन न्याय नहीं मिला। योगेंद्र का कहना है कि निरंतर पैरवी हो रही है। उसी सिलसिले में 14 दिसंबर को वह अपनी मां के साथ तहसीलदार कार्यालय पहुंचा। वहां पर तहसीलदार घनश्याम ने अभद्रता की। कहा कि मुकदमा उपजिलाधिकारी कोर्ट पर चल रहा है। कब्जा हटने का सवाल ही नहीं। मां के साथ अपशब्दों का प्रयोग करने की कोशिश तहसीलदार ने की। विरोध करने पर भला-बुरा कहा। इतनी बात कहने के बाद योगेंद्र ने डीएम के सामने अपनी जेब से सल्फास की गोलियां निकालकर खा लीं। पल भर में घटित घटना से डीएम भी अवाक रह गए। सल्फास खाने के बाद योगेंद्र की हालत बिगड़ने लगी। इस पर डीएम अजयदीप सिंह ने अपनी कार से उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाकर भर्ती करवाया। डीएम का कहना है कि उपजिलाधिकारी नानपारा को जांच के आदेश दिए गए हैं। साथ ही तहसीलदार घनश्याम को तलब किया गया है। उधर जिला अस्पताल में भर्ती योगेंद्र की हालत नाजुक बताई जा रही है।
डीएम बदलते रहे, लेकिन नहीं मिला न्याय
जिला अस्पताल में भर्ती योगेंद्र की मां शांती देवी का कहना है कि वह अपने पुत्र के साथ न्याय के लिए निरंतर दर-दर की ठोकरें खा रही है। पति की मौत के बाद पुत्र ने पैरवी शुरू की। जिलाधिकारी अभय सिंह, जिलाधिकारी किंजल सिंह, सतेंद्र यादव आदि डीएम आए। उनसे गुहार लगाई गई, लेकिन न्याय नहीं मिला। तहसीलदार विपक्षियों का पक्ष ले रहे हैं। इस पर बेटे ने आत्महत्या का कदम उठाया।
मां है आंगनबाड़ी सहायिका, योगेंद्र कर रहा बीटीसी
जिलाधिकारी चैंबर में डीएम के सामने सल्फास की गोलियां खाने वाला योगेंद्र बीटीसी का प्रशिक्षु है। जबकि उसकी मां शांती देवी आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर तैनात है।
तहसीलदार पर मढ़ा आरोप
जिला अस्पताल में भर्ती योगेंद्र और तीमारदारी कर रही उसकी मां ने नानपारा के तसीलदार घनश्याम पर गंभीर आरोप मढ़े हैं। भर्ती योगेंद्र ने कहा कि तहसीलदार ने ही आत्महत्या के लिए उकसाया। जिसके चलते उसने डीएम के चैंबर में सल्फास की गोलियां खा लीं।
हदबरारी का है मामला, हमसे कोई मतलब नहीं
मामला जमीन की हदबरारी का है। उपजिलाधिकारी न्यायालय पर मुकदमा लंबित है। जिस जमीन पर कब्जे की बात बताई जा रही है। वहां मकान बना हुआ है। उस मकान को न ढहाने का स्थगन आदेश कमिश्नर कोर्ट से पास है। ऐसे में मकान नहीं हटवाया जा सकता। महिला कभी सामने नहीं आई। एक बार योगेंद्र आया था तो मामला न्यायालय पर लंबित होने की बात कहकर उसे समझा दिया था। अब जिलाधिकारी ने तलब किया है। जाकर देखता हूं। -घनश्याम, तहसीलदार नानपारा