बाबागंज (बहराइच)। बाबागंज के श्री रामप्यारे इंटर कॉलेज में अमर उजाला की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत मंगलवार को आयोजित पुलिस पाठशाला में छात्राओं ने बेबाकी से अपनी राय रखी। शिक्षिकाओं ने भी बदलते समाज में सीमा सुरक्षा में जुटीं बेटियों की भूमिका के बारे में प्रकाश डाला।
चौकी इंचार्ज सोमपाल गंगवार ने कहा कि आज के समय में पुलिस की ओर से बेटियों की सुरक्षा को लेकर हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। बेटियां निडर होकर अपराधियों का मुकाबला करें, पुलिस हर कदम पर उनके साथ है। समाज में जागरूकता फैलाने की दिशा में किया जा रहा अमर उजाला का कार्य सराहनीय है। चौकी इंचार्ज ने छात्राओं को डायल 100, 1090, 181 आदि के बारे में भी जानकारी दी। कार्यक्रम को हेड कांस्टेबल महेश चंद्र उपाध्याय, प्रभारी प्रधानाध्यापक रावेंद्रनाथ शर्मा, शिक्षक महेंद्र नाथ, रंजना मिश्रा, रेशमा खातून आदि ने भी संबोधित किया।
पुलिस महिलाओं की सुरक्षा को हर समय तत्पर है। थानों में भी छात्राओं व बेटियों की बात सुनने के लिए अलग से महिला कांस्टेबल तैनात हैं। बस जरूरत है कि हम अपनी आवाज को बुलंद करें। आप हम तक शिकायत लाएं। आपकी पहचान गुप्त रखते हुए अपराधियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
सोमपाल गंगवार, चौकी इंचार्ज
नारी है देश का निर्माण बेटियां की काव्य रचना के साथ संदेश देते हुए कहा कि देश के भविष्य की बागडोर बेटियों के ही हाथ में है। आज के समय में थल सेना, जल सेना और वायु सेना में बेटियां तैनात हैं। यह उनकी कार्यक्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन है।
रावेंद्र नाथ शर्मा, प्रभारी प्रधानाध्यापक
व्यक्ति के मृत्यु के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन ईश्वर ने जन्म देने का अधिकार सिर्फ मां को दे रखा है। महिला को कमजोर समझना किसी भी समाज के लिए अच्छा संदेश नहीं है। सीमा सुरक्षा में भी देश की बेटियां बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।
महेंद्रनाथ शर्मा, शिक्षक
वर्तमान में महिलाओं के उत्थान का दौर है। देश की सुरक्षा के साथ ही अंतरिक्ष में भी महिलाएं कदम रख चुकी हैं। यह उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचायक है। महिलाओं का दबदबा अब हर क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है।
रंजना मिश्रा, शिक्षिका
महिला सशक्तीकरण के लिए केंद्र और राज्य की सरकार कई कार्यक्रम चला रही हैं। महिलाएं अब किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। स्वावलंबन की बढ़ती भावना ने महिलाओं को और भी मजबूत किया है।
रेशमा खातून, शिक्षिका
समाज में महिलाओं के प्रति सोच को बदलने की जरूरत है। भेदभाव खत्म नहीं होने तक वह अधिकारों के लिए इधर-उधर चक्कर काटेंगी। समाज से बुराइयों का खात्मा ही महिला उत्थान की पहली सीढ़ी होगी।
महेश चंद्र उपाध्याय, हेड कांस्टेबल
बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। मगर समाज में भ्रूण हत्या से महिलाओं की सुरक्षा और उनकी भागीदारी प्रभावित हो रही है। इसलिए सरकार को भ्रूण हत्या पर लगाम लगाने की जरूरत है।
शिल्पा गुप्ता
बेटियों को बराबरी का हक देने में समाज भी पीछे रहता है। ऐसे में महिलाओं को भी अपने अधिकार हासिल करने के लिए संघर्ष का रास्ता चुनना पड़ेगा। इससे सफलता हासिल हो सकती है।
श्वेता गुप्ता
ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को उच्च शिक्षा देने में अभिभावक आज भी उदासीन हैं, जिससे बेटियां आगे नहीं बढ़ पाती हैं। उन्हें उच्च शिक्षा दिलाकर बेटियों को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।
सीमा वर्मा
सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर अमर उजाला की ओर से महिला उत्थान के लिए चलाया जा रहा अभियान सराहनीय है। एसएसबी व कस्टम के अधिकारियों के साथ ही शिक्षकों की बातों ने हमें काफी प्रेरित किया है।
आसरा पाठक
देश की सुरक्षा के लिए सभी को सजग प्रहरी के रूप में काम करने की जरूरत है। अधिकारियों की प्रेरणा के बाद अब मैं भी सेना में अधिकारी बनकर देश की सुरक्षा के लिए काम करना चाहती हूं।
अंशिका सोनी
महिलाओं को समाज में उपेक्षित रखा जाता है। बेटों को जिस तरह से परिवार में तरजीह दी जाती है। बेटियों को वह अधिकार नहीं मिल पाते। ऐसे में बराबरी का हक देने पर बेटियां भी देश का गौरव बन सकती हैं।
सोनी चौरसिया
समाज की रूढ़िवादी परंपरा महिलाओं के आगे बढ़ने में रोड़ा बन रही थी। लेकिन आज के दौर में महिलाएं इन परंपराओं को तोड़कर अंतिम संस्कार से लेकर हर क्षेत्र में काम करने के लिए घर की दहलीज लांघकर निकल रही हैं।
सीमा साह