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बंद कमरे में की पूछताछ, खंगाले दस्तावेज

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बहराइच में रविवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण करते प्रमुख सचिव। - फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। महाराजा सुहेलदेव स्वायत्तशासी मेडिकल कॉलेज में भवन निर्माण, उपकरण खरीद व दवाओं की खरीद में हुई धांधली की जांच करने रविवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां उन्होंने बंद कमरे में स्वास्थ्य महकमे के उच्चाधिकारियों से जानकारी प्राप्त करते हुए विभिन्न अभिलेख भी खंगाले। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों का भी गहनता से निरीक्षण किया। प्रमुख सचिव जांच के बाद कई आवश्यक अभिलेख भी अपने साथ ले गए। प्रमुख सचिव की जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में अफरातफरी मची रही।
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उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक के निर्देश पर रविवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां उन्होंने सीएमएस कक्ष में अधिकारियों के साथ गोपनीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने कक्ष में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.एके साहनी, सीएमओ डॉ.एसके सिंह व सीएमएस डॉ.ओपी चौधरी से अलग-अलग पूछताछ भी की। कई सवालों का संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने प्राचार्य डॉ.एके साहनी को फटकार भी लगाई। इसके बाद उन्होंने औषधि भंडार का निरीक्षण कर विभिन्न अभिलेख भी खंगाले। इस दौरान कई आवश्यक अभिलेख वह अपने साथ भी ले गए।
जांच के बाद प्रमुख सचिव ने मेडिकल कॉलेज भवन, डेंगू वार्ड, एमसीएच विंग के एसएनसीयू व पीएनसी वार्ड, जिला चिकित्सालय में निर्माणाधीन 60 बेड के आर्थो व ओटी वार्ड एवं एसआर/जेआर आवासीय भवन के साथ ही जनपद में निर्मित होने वाले नर्सिंग कॉलेज की भूमि के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, पुराना मलेरिया अस्पताल एवं गुल्लावीर का निरीक्षण किया। जिला चिकित्सालय में निर्माणाधीन आर्थों व ओटी वार्ड के साथ ही आवासीय भवनों को बनाने वाली कार्यदायी संस्था को सभी कार्य मानक के अनुसार कराने के निर्देश दिए। अधिकारियों के साथ बैठक में प्रमुख सचिव ने मेडिकल कॉलेज को मानक के अनुसार संचालित कराने के निर्देश दिए। इस अवसर पर डीएम डॉ.दिनेश चंद्र, सीडीओ कविता मीना, एडीएम मनोज, सिटी मजिस्ट्रेट ज्योति राय, सीओ नगर डॉ.जंगबहादुर यादव, प्रबंधक रिजवान समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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यह थे जांच के बिंदु
मेडिकल कॉलेज के भवन निर्माण में 32 करोड़ से अधिक की धनराशि का घोटाला किया गया था। इस मामले में निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर व 32 फर्मों पर मुकदमा पंजीकृत करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भी रवाना किया जा चुका है। इसके साथ ही दवाओं की खरीद व उनके रखरखाव में भी काफी अनियमितताएं बरती गई है। जिसका खुलासा बीते 20 अगस्त को डीएम डॉ.दिनेश चंद्र द्वारा कराई गई जांच में हुआ था। जांच के दौरान लगभग 11 सौ रुपये की लागत का मेरोट्रॉल इंजेक्शन पर नॉट फॉर सेल की मुहर नहीं लगी पाई गई थी। इसके साथ ही महंगी दवाओं को औषधि भंडार में न रखकर उन्हें अलग कक्ष में रखा गया था। जांच टीम ने महंगी दवाओं के दुरुपयोग की रिपोर्ट भी डीएम को सौंपी थी। इसके बाद डीएम ने औषधि भंडार में नियुक्त इंचार्ज को हटाते हुए कई चिकित्सकों पर कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी थी। बीते 30 अगस्त को डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को उनके समक्ष गंभीरता से रखा था। जिस पर उन्होंने शीघ्र ही प्रमुख सचिव को जनपद भेजकर जांच का आश्वासन दिया था।
मेडिकल कॉलेज में बढ़ेंगी सुविधाएं
महाराजा सुहेलदेव स्वायत्तशासी मेडिकल कॉलेज में बहराइच समेत श्रावस्ती, गोंडा, बहराइच व पड़ोसी देश नेपाल के भी मरीज काफी संख्या में आते हैं। ऐसे में यहां सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। रेडियोलॉजिस्ट की कमी की बात यहां सामने आई है। शीघ्र ही यहां दो रेडियोलॉजिस्ट की और तैनाती करते हुए सीटी स्कैन मशीन व एमआरआई की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
-आलोक कुमार, प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा।
त्यागपत्र दे चुके डॉक्टर की लगी पोस्टमार्टम में ड्यूटी
बहराइच। थाना हुजूरपुर अंतर्गत ग्राम रामपुर पिपरा निवासी एक युवक बीते शुक्रवार को मार्ग दुर्घटना में घायल हो गया था। उसका इलाज जिला चिकित्सालय में चल रहा था। शनिवार की देर रात उसकी मौत हो गई। शव के पोस्टमार्टम के लिए ऐसे चिकित्सक की ड्यूटी लगा दी गई जो बीते एक नवंबर को ही त्यागपत्र दे चुके हैं। पोस्टमार्टम समय से न होने पर प्रमुख सचिव की बैठक के दौरान ही परिजनों ने जमकर हंगामा किया।
सौरभ सिंह (32) अपनी बाइक से बीते शुक्रवार को रात लगभग आठ बजे कहीं जा रहे थे। तभी बहराइच से करनैलगंज जा रही कार ने उसे पीछे से टक्कर मार दी थी। जिससे सौरभ गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के लिए उनका शव मर्च्युरी में रखवा दिया गया था। पोस्टमार्टम के लिए कैसरगंज सीएचसी पर तैनात डॉ.राधाकृष्ण मिश्रा की ड्यूटी लगा दी गई थी। जबकि वह बीते नवंबर को अपना त्यागपत्र दे चुके हैं। पोस्टमार्टम में देरी होने व चिकित्सक के त्यागपत्र देने की बात पता चलते ही सीएमएस कक्ष के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। आननफानन अधिकारियों ने कक्ष से बाहर निकलकर किसी प्रकार परिजनों को शांत कराते हुए दूसरे चिकित्सक को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
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