बहराइच। मेडिकल कॉलेज के परिसर व वार्डों में भर्ती मरीजों, उनके तीमारदारों व चिकित्सकों समेत अन्य कर्मियों पर आवारा पशुओं के कारण संकट मंडरा रहा है। रविवार की सुबह लगभग साढ़े सात बजे एक आवारा सांड़ मेडिकल कॉलेज के वार्ड में घुस गया। जिससे वार्ड में मौजूद तीमारदारों में अफरातफरी मच गई। सभी तीमारदार अपने मरीज लेकर वार्ड से बाहर निकल गए। वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मी भी सांड़ को वार्ड में घुसा देख सहम गए। काफी देर तक तीमारदारों ने मशक्कत कर सांड़ को बाहर निकाला। लगभग 15 दिन पूर्व भी एक सांड़ आपातकालीन कक्ष में घुस गया था। जिससे वहां मौजूद चिकित्सक, मरीज व अन्य कर्मी भाग खड़े हुए थे।
महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय व इससे संबद्ध जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन काफी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। उनके साथ तीमारदार के रूप में उनके परिजन भी मौजूद रहते हैं। इसके साथ परिसर व वार्डों में चिकित्सकों समेत अन्य चिकित्सा कर्मी भी मौजूद रहते हैं, लेकिन आवारा पशुओं के हमले का डर सभी को बना रहता है। रविवार की सुबह एक आवारा सांड़ मेडिकल कॉलेज के वार्ड में घुस गया। इससे वार्ड के कमरे व बरामदों में भर्ती मरीजों व उनके तीमारदार किसी अनहोनी की आशंका से सिहर उठे। कुछ लोगों ने सांड़ को वार्ड के बाहर भगाने का प्रयास किया। जिससे सांड़ आक्रोशित हो उठा।
सांड़ को गुस्से में देख तीमारदार अपने मरीजों को वार्ड से बाहर निकाल लाए। कोई अपने मरीज को गोद में तो कोई कंधे पर लटका कर वार्ड से बाहर परिसर की ओर भागा। लगभग 18 से 20 तीमारदार अपने मरीजों को लेकर परिसर में पहुंच गए। वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मी भी अपने कमरे में दुबक गए। मौके पर मौजूद कुछ तीमारदारों ने सांड़ को वार्ड से भगाने का भी प्रयास किया। इस पर सांड़ एक वार्ड से निकलकर दूसरे वार्ड में चला गया। जिससे वहां भी अफरातफरी मच गई।
काफी मशक्कत के बाद किसी प्रकार लोगों ने सांड़ को वार्ड से बाहर निकाला। इसके कुछ दिनों पूर्व भी आपातकालीन कक्ष में देर रात एक आवारा सांड़ घुस गया था। जिस पर वहां मौजूद चिकित्सकों समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौके से भागने पर विवश हुए थे। हालात यह हैं कि मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन आने वाले मरीजों, तीमारदारों व चिकित्सकों पर आवारा पशुओं के हमले का डर बना हुआ है। परिसर में भी काफी संख्या में आवारा पशु प्रतिदिन घूमा करते हैं। इससे कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
नहीं हैं सुरक्षा के कोई उपाय
मेडिकल कॉलेज बनने से पूर्व जिला चिकित्सालय में पशुओं का प्रवेश रोकने के लिए पुरुष व महिला गेट पर लोहे के पाइप लगे हुए थे। जिससे आवारा पशु चिकित्सालय परिसर में प्रवेश नहीं कर पाते थे, लेकिन कई वर्ष पूर्व यह पाइप क्षतिग्रस्त हो गए। जिससे मेडिकल कॉलेज व जिला चिकित्सालय परिसर में आवारा पशुओं का डेरा लगा रहता है।
सीसी मार्ग बनने के बाद लगेगा काऊ कैचर
मेडिकल कॉलेज के वार्डों व परिसर में आवारा पशुओं के घुसने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कॉलेज के अंदर सीसी मार्ग बनवाने के लिए पैक्सफेड संस्था को कार्य सौंपा गया है। संस्था की ओर से शीघ्र ही कार्य शुरू कराने की बात कही गई है। सीसी मार्ग बनने के बाद यहां काऊ कैचर की स्थापना कराई जाएगी। जिससे मेडिकल कॉलेज परिसर में आवारा पशुओं के प्रवेश से निजात मिलेगी। तब तक आवारा पशुओं को परिसर से बाहर निकालने व उन्हें पकड़वा कर किसी अन्य स्थान पर छोड़ने के लिए नगरपालिका को पत्र लिखा गया है। -डॉ.संजय खत्री, प्राचार्य।