बहराइच के मेडिकल कॉलेज में खड़े मरीजों व शवों को ले जाने वाले निजी वाहन। संवाद
बहराइच। मेडिकल कॉलेेज में मरीजों की मौत के बाद उनके शव को घर तक ले जाने में परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए भले ही निशुल्क सुविधा है और यहां दो सरकारी वाहन भी है लेकिन इसका लाभ पीड़ितों को नहीं मिल पाता। यदि किसी व्यक्ति का निधन होता है तो परिजनों के पास वाहन न होने की दशा में निजी वाहन संचालकों द्वारा उनसे मुंहमांगे दाम वसूल किए जाते हैं। परिजनों द्वारा इस पर आपत्ति व्यक्त करने पर घंटों तक उनके साथ सौदेबाजी की जाती है। मजबूरी में मृतक के परिजनों को मुंहमांगा दाम देकर शव को घर तक ले जाने की व्यवस्था करनी पड़ती है।
गंभीर रोगों से पीड़ित काफी संख्या में लोग बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज आते हैं। जहां संबंधित विभागों में उन्हें भर्ती कर उनका इलाज किया जाता है। यहां आने वाले रोगियों में जिले के दूरदराज क्षेत्रों के साथ ही पड़ोसी जनपद श्रावस्ती, गोंडा व बलरामपुुर समेत नेपाल से भी काफी संख्या में मरीज आते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले अधिकांश मरीजों व उनके तीमारदारों के पास वाहन उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में किसी मरीज की मौत होने पर उसे तत्काल वाहन की आवश्यकता पड़ती है। मेडिकल कॉलेज परिसर में मौजूद वाहन चालकों द्वारा इसके बाद मृतक के परिजनों से सौदेबाजी का खेल शुरू हो जाता है। निजी वाहन संचालकों द्वारा परिजनों को घेर कर चंद किलोमीटर की दूरी तक शव पहुंचाने की एवज में हजारों रुपए की मांग की जाती है। कई बार तो दोनों पक्षों में घंटों सौदेबाजी चलती रहती है। थक-हार कर परिजन इनकी मांग पूरी करते हुए शव को घर तक ले जाने की व्यवस्था करते हैं। यह समस्या बीते काफी समय से चली आ रही है। इन वाहन संचालकों द्वारा अपने वाहन मेडिकल कॉलेज परिसर में ही खड़े किए जाते हैं। 24 घंटे वाहन परिसर में खड़े रहने के बाद भी जिम्मेदार इनका संज्ञान नहीं लेते।
निजी वाहन संचालकों की ओर से वार्डों में घूम-घूमकर मरीजों को बहला फुसलाकर निजी नर्सिंग होम भी ले जाया जाता है। इसके एवज में इन्हें निजी नर्सिंग होम से मोटा कमीशन मिलता है। रात होने पर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के घर रवाना होने के बाद इन वाहन चालकों की ओर से जमकर मनमानी की जाती है। पूरे परिसर में विशेष रूप से बाल रोग विभाग के बगल व उसके पीछे ऐसे वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है। सुरक्षा के नाम पर मेडिकल कॉलेज परिसर में तैनात पुलिस कर्मियों व सीसीटीवी कैमरों से निगरानी के बाद भी यह धंधा बेरोकटोक जारी है।
मेडिकल कॉलेज की ओर से किसी मरीज की मौत होने पर शव को घर तक पहुंचाने के लिए दो वाहन हैं। लेकिन यहां कभी चालक उपलब्ध न होने तो कभी वाहन में तकनीकी कमी बताते हुए वाहन उपलब्ध नहीं कराए जाते हैैं। लेकिन यदि सामने वाला व्यक्ति कोई नेता, अफसर या रसूखदार का जानने वाला है तो उसे यह सुविधा मिनटों में मिल जाती है। इसके पीछे अस्पताल कर्मियों की मिलीभगत रहती है। कर्मचारी भी निजी वाहन चालकों से कमीशन लेते है जिससे उनका यह काम अस्पताल में आसानी से चलता रहता है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय खत्री का कहना कि मेडिकल कॉलेज परिसर में अवैध तरीके से वाहन खड़ाकर मृतक के परिजनों से मनमानी वसूली करना गलत है। मानवीय दृष्टिकोण से भी यह अक्षम्य है। परिजनों से अवैध वसूली करने में जुटे वाहनों की जांच कराते हुए इन पर कार्रवाई की जाएगी।