बहराइच। तराई इलाकों में सर्दी का सितम थमने का नाम नहीं ले रहा। बुधवार को दिन भर चली बर्फीली हवाओं ने ठिठुरन कायम बनो रखी। शीतलहर से बेहाल लोग घरों में ही दुबके रहने को विवश रहे। हालांकि तीन दिन बाद दोपहर में कुछ समय के लिए सूर्यदेव के दर्शन होने से हल्की धूप खिली। इसके बावजूद गलन से राहत न मिल पाने से अधिकतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस लुढ़क कर 17 सेल्सियस तक पहुंच गया। ठंड के प्रकोप के चलते ही साप्ताहिक अवकाश या सार्वजनिक छुट्टी न होने के बावजूद बाजारों और प्रमुख सड़कों पर रौनक गायब रही।
शीतलहर ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। नए साल के पहले माह में ही सर्दी का सितम कम होने के बजाय बढ़ रहा है। बुधवार को भी गलन भरी ठंड ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर किया। इससे बचने के लिए लोग अलाव का सहारा लेते दिखे। लगातार जारी ठंड के प्रकोप से अब किसानों के माथे पर भी परेशानी दिखने लगी है। पाला गिरने से फसलों को होने वाला नुकसान उनकी दिक्कत बढ़ा रहा है। चित्तौरा ब्लॉक के धरसवां निवासी किसान राजकुमार ने बताया कि उन्होंने गेहूं और सरसो की फसल बोई है। लेकिन बीते चार दिनों से लगातार गिर रहे कोहरे से सरसों की फसल खराब होने का अंदेशा परेशान करने लगा है। रुपईडीहा के गंगापुर निवासी किसान रामसुहावन ने बताया कि अगर ऐसे ही लगातार सर्दी का सितम जारी रहा तो गेहूं की फसल को तो फायदा लोगा लेकिन बाकी फसल चौपट हो जाएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र प्रथम के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक वीपी शाही ने लगातार पड़ रही सर्दी व कोहरे के कारण फसलों को होने वाले नुकसान के संबंध में किसानों को सचेत किया है। बताया कि पाले से फसलों व सब्जियों के फूल खराब होने लगते हैं, और फिर झड़ जाते हैं। वहीं कई फसलों के फूल काले पड़ जाते हैं और पत्तियां खराब होकर गिरने लगती हैं। उन्होंने बताया कि पाले से बचाव के लिए किसान फसलों की हल्की सिंचाई करना बेहतर होता है। साथ ही गुनगुने पानी का छिड़काव कर भी पाले का असर कम किया जा सकता है।
भीषण ठंड से बचाव के लिए शहरी इलाकों में लोग महंगे गर्म कपड़ों रजाई, कंबल व रूम हीटर इत्यादि का प्रयोग सुलभ व बेहतर मानते हैं। जबकि ग्रामीण इलाकों में अधिकांश लोग अभी भी ठंड से बचने के लिए सुबह शाम दंड-बैठक करने के साथ पुआल के बिस्तर पर सोते हैं। नानपारा निवासी 80 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक हनुमान प्रसाद मिश्र ने बताया कि ऐसा नहीं है, कि इसी साल बहुत ठंडी है। इससे पहले भी कई बार भीषण ठंडी पड़ी है। उन्होंने बताया कि दंड-बैठक लगाने, कसरत करने व पुआल के बिस्तर पर सोने से शरीर में गर्मी बनी रहती है।
ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए कश्मीर व तिब्बती गर्म कपड़ों की बाजार भी शहर में सज गई है। पानी टंकी चौराहे के पास तिब्बत से आए व्यापारियों द्वारा लगाए गए गर्म कपड़ों के स्टॉल पर खरीदारी करने वालों की भीड़ सुबह से लेकर देर शाम तक जुट रही है। सबसे ज्यादा बिक्री रंग बिरंगी ऊनी टोपियों व स्वेटर की कर रही है। वहीं एसपी आवास के सामने कश्मीर से आए व्यापारियों की सजी दुकानें ठंड बढ़ने के साथ ही गुलजार दिख रही हैं। यहां फरवाले जैकेट व मफलर की मांग ज्यादा है।
मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. प्रभाकर मिश्र ने बताया कि भीषण ठंड के कारण लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में हृदय रोगी, शुगर, ब्लड प्रेशर व सांस लेने की तकलीफ से पीड़ित मरीजों को विशेषतौर पर सावधानी बरतना चाहिए। किसी रोग से पीड़ित व्यक्ति के साथ ही सभी लोगों को इस मौसम में नमक व खाद्य तेल से बनी सामग्री का सेवन न्यून्तम करना चाहिए।
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि ठंड के दौरान अधिकांश लोग सांस लेने में तकलीफ, जुकाम, सिरदर्द व बुखार जैसी समस्याओं से पीड़ित होते हैं। इससे बचाव के लिए चाय की जगह काढ़े का प्रयोग सभी के लिए कई तरह से फायदेमंद साबित होता है। इसमें अदरक, तुलसी आदि का प्रयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही च्यवनप्राश व आंवले के साथ ही गिलोय का भी सेवन ठंड में होने वाली बीमारियों से बचाता है।