बहराइच। निकाय चुनाव में जारी आरक्षण का सभासदों ने पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। सभासद और संभावित प्रत्याशियों ने डीएम को आपत्ति पत्र सौंपकर वार्डों के आरक्षण पर आपत्तियां दर्ज कराते हुए दोबारा विचार करने की मांग की।
निकाय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के इंतजार के बीच शासन की ओर से निकाय चुनाव में बीते एक दिसंबर की रात वार्डों के आरक्षण की अंतरिम सूची जारी कर दी गई थी। शासन ने आरक्षण पर दावे व आपत्तियों का समय निर्धारण करते हुए एक सप्ताह का समय दिया गया है।
आरक्षण की सूची जारी होने के बाद कई वार्डो के मौजूदा सभासदों के चहरे पर मायूसी छा गई थी। जबकि कई ऐसे प्रत्याशियों को भी आरक्षण में मायूसी हाथ लगी, जो विगत तीन माह से चुनाव में अपनी सियासी जमीन बनाने में जुटे हुए थे।
अब सभी ने आरक्षण के विरोध मेें आवाज उठाना शुरू कर दिया है। चुनाव की तैयारियों में जुटे प्रत्याशी व उनके समर्थकों ने आरक्षण सूची में मनमानी का आरोप लगाते हुए डीएम को आपत्ति देकर दोबारा सत्यापन की मांग की।
वार्ड के मौजूदा सभासद मेराज अहमद चुनऊ व उनके समर्थकों ने डीएम को पत्र सौंपकर कहा कि वर्ष 2017 में वार्ड सामान्य जाति के लिए आरक्षित की गई थी। जबकि वर्ष 2012 में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित थी। मौजूदा परिसीमन में कर्मचारियों द्वारा गलत ढंग से कानूनगोपुरा दक्षिणी का आंशिक भाग और वार्ड नंबर नौ के कुछ मतदाताओं को संत्तीकुआं वार्ड में जोड़ दिया है। जबकि वार्ड में सामान्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। ऐसे में जारी की गई आरक्षण की सूची वार्डवासियों के साथ अन्याय है। पुन: जांच कराकर वार्ड को सामान्य श्रेणी में कराया जाए।
वार्ड नंबर तीन मंसूरगंज के मतदाताओं ने डीएम को सौंपे गए आपत्ति पत्र में कहा है कि मोहल्ला मंसूरगंज में 90 प्रतिशत की आबादी ओबीसी मतदाताओं की है। पांच प्रतिशत सामान्य और पांच ही प्रतिशत अनुसूचित जाति की है। सभी का आरोप है कि वार्ड में नगर पालिका के कर्मचारियों की गलत सूचना के आधार वार्ड को अनुसूचित जाति में आरक्षित कर दिया गया है। जो न्याय संगत नहीं है। मतदाताओं ने कहा वर्ष 2017 में वार्ड सीट ओबीसी के लिए आरक्षित थी। सभी ने डीएम से मोहल्ले का पुनर्विवेचना कराकर वार्ड को पैनल के हिसाब से ओबीसी महिला कराने की मांग की है। पत्र सौंपने वालों में दिनेश कुमार पटवा, उर्मिलादेवी नाग, मंगल शुक्ला, नफीस अहमद कुरैशी, कलीम अहमद अंसारी, मोहम्मद अफसर आदि शामिल रहे।
वार्डवासियों ने डीएम को सौंपे गए आपत्ति पत्र में कहा है कि वार्ड 2007 में अनुसूचित जाति महिला, वर्ष 2012 में सामान्य और वर्ष 2017 में अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित था। वार्ड में सबसे ज्यादा मतदाता सामान्य वर्ग हैं। वार्डवासियों ने कहा कि अगर नियम के अनुसार चक्रानुक्रम को देखा जाए, तो भी इस वार्ड का आरक्षण अनारक्षित होना चाहिए, लेकिन कर्मचारियों के गलत निरीक्षण के चलते सभी नियमों को ताक पर रखते हुए वार्ड को पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है। सभी ने डीएम से पुन: अनारक्षित श्रेणी में रखने की मांग की है। इस मौके पर शिवम कुमार शुक्ला, विवेक पांडेय, एके पांडेय, वेदप्रकाश श्रीवास्तव, दीपेंद्र श्रीवास्तव, विवेक सिंह, यशराज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।