बहराइच। रेलवे प्रशासन व्यापार व कारोबार के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर बनाने की कवायद में जुटा है। इसके तहत यूपी, बिहार व बंगाल तक मालवाहक गाड़ियों के आवागमन को सुलभ व बेहतर बनाने के लिए सरयू नदी पर तीसरा पुल बनवाने की कवायद शुरू की गई है। दो सौ करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रस्तावित सेतु का निर्माण कार्य संजय सेतु के पास से शुरू हुआ है। रेलवे की तरफ से बनवाए जा रहे इस पुल से सिर्फ माल वाहक ट्रेनों का संचालन ही होगा। इसका सीधा फायदा कारोबारियों को मिलेगा।
जरवलरोड के पास बने सरयू नदी पर संजय सेतु के पास ट्रेनों के संचालन के लिए रेलवे ने पहले से ही दो पुल बना रखे है। यात्री व मालवाहक ट्रेनों की अत्यधिक संख्या के कारण दो पुल होने के बाद भी पूरा रूट अति व्यस्त रहता है। ऐसे में यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता मिलने के कारण मालवाहक ट्रेनों के आवागमन में काफी दिक्कत भी रहती है। इस परेशानी से छुटकारा दिलाने के लिए ही रेलवे प्रशासन ने यहां पर एक और नया पुल बनाने का काम शुरू किया है।
रेलवे के तीसरे ब्रिज को बनाने का कार्य रॉकेरा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड ने संभाल रखा है। इसके निर्माण में करीब दो सौ करोड़ का खर्च अनुमानित है। डेडीकेटेड फ्रंट कॉरिडोर (डीएफसी) भारत सरकार की एक महत्वकांक्षी योजना है। इसके तहत उच्च क्षमता वाला एक ऐसा कॉरिडोर विकसित करना है जो पूरी तरह कारोबार से जुड़े मॉल परिवहन में ही इस्तेमाल आए। नदी पर तीसरा रेलवे ट्रैक बनने से मालवाहक गाड़ियों का आवागमन पटरी पर आने से इस इलाके में व्यापार को एक नई ऊंचाई मिलेगी। संवाद
सरयू नदी के संजय सेतु पर तीसरा पुल बनाने के साथ ही यहां पर तीसरी रेलवे लाइन भी बिछाने की तैयारी है। अभी तक यहां पर डबल रेलवे लाइन है। इस मार्ग से लखनऊ से लेकर बाराबंकी होते हुए गोरखपुर, बिहार, पश्चिम बंगाल से लेकर कई राज्यों से ट्रेनों का आवागमन होता है। यहां से कोयला लदी मालगाड़ी भी काफी संख्या में निकलती है।
रेलवे से जुड़े अफसरों की माने तो इस रूट पर इस समय करीब दो सौ से अधिक सवारी और सौ से अधिक मालवाहक ट्रेनों का संचालन होता है। किसी न किसी कारण से इनमें से कई ट्रेनें निरस्त रहने के कारण इनकी संख्या में कुछ कमी रहती है। इसके बावजूद यह रूट काफी व्यस्त माना जाता है। ऐसे में यात्री ट्रेनों की संख्या ज्यादा होने के कारण माल वाहक गाड़ियों को घंटो पुल के आस पास रेल लाइन या फिर आसपास के रेलवे स्टेेशन पर घंटो खड़े रहकर रूट साफ होने का इंतजार करना पड़ता है।