बहराइच। सरकारी धान की खरीद में बढ़चढ़ कर हिस्सेदारी करने वाली सहकारी समितियों के खरीद केंद्रों पर फिलहाल धान खरीद का कार्य ठप पड़ा है। खरीद केंद्रों का कामकाज छोड़कर धरना प्रदर्शन कर रहे समितियों के सचिवों के कारण इनसे जुड़े 82 खरीद केंद्रों पर फिलहाल ताला लगा है। नाराज सचिव बीते वर्ष हुई गेहूं व धान खरीद की बकाया कमीशन राशि का भुगतान अभी तक न किए जाने से नाराज है। आंदोलित सचिवों का आरोप है कि पीसीएफ प्रबंधक की लापरवाही के चलते उन्हें बीते वर्ष हुई धान और गेहूं खरीद का कमीशन व पल्लेदारी का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। इसके चलते उन्हें आर्थिक बदहाली के दौर से गुजरना पड़ रहा है।
अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलित सचिवों ने सहकारी समिति कर्मचारी संघ के बैनर तले सोमवार से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है। पीसीएफ कार्यालय पर जुटे कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। संघ के जिलाध्यक्ष चंद्र प्रताप त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 2021-22 में हुई धान खरीद व वर्ष 2022-23 में हुई गेहूं खरीद का कमीशन अभी तक नहीं दिया गया है। इस कारण समिति के सचिवों को आर्थिक बदहाली की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। बताया कि कमीशन राशि के साथ ही वर्ष 2018-19 व 2019-20 की पल्लेदारी का भुगतान भी अभी तक नहीं किया गया है। संघ के महामंत्री भवानी प्रसाद मिश्र ने बताया कि सचिवों को कोई मानदेय नहीं मिलता है।
खरीद कार्य पर उन्हें सरकारी धान की खरीद पर प्रति क्विंटल 32 और गेहूं पर प्रति क्विंटल 27 रुपया राशि बतौर कमीशन प्राप्त होती है। इसी से खुद के साथ ही परिवार का भरण पोषण करना पड़ता है। इसके बावजूद प्रबंधन से जुड़े अफसरों की लापरवाही के चलते बकाया कमीशन राशि के भुगतान की मांग को लगातार अनसुना किया जा रहा है। आंदोलित सचिवों ने चेताया कि जब तक कमीशन व पल्लेदारी की बकाया धनराशि का भुगतान नहीं होगा, समिति पर धान खरीद कार्य बंद रखा जाएगा। आरोप लगाया कि पीसीएफ प्रबंधन से जुड़े अफसरों ने मिल स्वामियों से साठगांठ कर उनका भुगतान तो कहा दिया लेकिन खरीद कार्य से जुड़े कर्मचारियों को भुगतान के लिए साल भर से दौड़ाया जा रहा है।