फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाढ़ से चौपट हुई 68 हजार हेक्टेअर फसल

विज्ञापन
विज्ञापन
बहराइच। अक्टूबर माह में आफत बनी बारिश व बाढ़ ने इस बार तराईवासियों की दीपावली फीकी कर दी है। बाढ़ व बारिश के पानी की चपेट में आकर तराई क्षेत्र में करीब 68 हजार हेक्टेयर फसल पूरी तरह चौपट हो जाने का अंदेशा है। दीपावली से कुछ दिन पहले हुए इस मौसमी वज्रपात से इस बार त्योहार पर किसानों के चेहरे मुरझाए हैं। खेतों में चौपट हुई फसल को देखकर काश्तकारों के सामने अब खेती किसानी के खर्च की लागत तक निकाल पाना बड़ी चुनौती बना है।
विज्ञापन

अक्टूबर माह के शुरूआती आठ दिनों में हुई रिकार्ड 300 मिलीमीटर से अधिक बारिश और इसके बाद व्याप्त बाढ़ के प्रकोप ने किसानों के चेहरों से दीपावली की खुशियां छीन ली है। अतिवृष्टि के चलते जिन इलाकों में बाढ़ नहीं आई, वहां के किसान भी इससे प्रभावित हुए हैं। बाढ़ ग्रस्त इलाकों में स्थित खेतों में अभी तक पानी भरा होने से पैदावार पूरी तरह नष्ट हो गई है। इतना ही नहीं बाढ़ के पानी से खेतों में जमा हुई सिल्ट के कारण धान की बालियों से अंकुरण तक फूटने लगे हैं। कृषि विभाग के अनुसार इस अतिवृष्टि व बाढ़ की चपेट में आकर लगभग 40 प्रतिशत फसल के पूरी तरह खराब होने का अंदेशा है।
जिला कृषि अधिकारी सतीश पांडेय ने बताया कि इसके तहत लगभग 54 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हुई धान, 12 हजार हेक्टेयर में हुई मक्का व 2 हजार हेक्टेयर में हुई दलहन व तिलहन की फसल चौपट हुई है। इसके साथ ही सैकड़ों हेक्टेयर इलाके में हुई सब्जी की पैदावार खेतों में ही सड़ कर खराब हो चुकी है। बारिश व बाढ़ ने गन्ने की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। चौपट हुई फसल के कारण लागत तक न निकल पाने से अब लाखों किसानों के समक्ष रबी सीजन की फसलों की बुवाई भी बड़ी चनौती बन गई है। पीड़ित किसानों की माने तो बर्बाद हुई फसल का आंकड़ा कृषि विभाग की रिपोर्ट से कहीं ज्यादा है। किसान पूरे तराई इलाके में 60 प्रतिशत फसल के पूरी तरह चौपट हो जाने की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन

नानपारा तहसील के सधुवापुर में खेतों में भीषण जलभराव देखने को मिल रहा है। किसान सत्यदेव ने बताया कि सूखे के चलते महंगे डीजल पंप से सिंचाई कर फसल लगायी थी, लेकिन अतिवृष्टि से खेतों में इतना पानी भर गया है, कि अब फसल बचाने के लिए बिना तैयार फसल को काटना पड़ रहा है। रिसिया के भगतापुर निवासी किसान दीनानाथ, राधेश्याम, दिनेश, सुरेश प्रताप व राजेश तिवारी ने बताया कि खेतों में गिरी धान की फसल में अंकुर फूटने लगा है। ऐसे में अब जो धान की बालियां सही बची हैं, उन्हें छांट-छांट कर निकाला जा रहा है। इस बाढ़ में सारी जमा पूंजी चली गयी। अब रबी सीजन की बुवाई कैसे होगी यही सोच कर परेशान हैं।
जिले में 40 प्रतिशत तक फसलें बारिश व बाढ़ से खराब हुई हैं। जिन किसानों का नुकसान हो गया है, वह बीमा कंपनी को फोन द्वारा या फिर कृषि कार्यालय के माध्यम से इसकी सूचना दे दें। सभी बीमित किसानों को क्राफ्ट कटिंग के हिसाब से नुकसान की भरपायी सुनिश्चित कराई जाएगी।
विज्ञापन

सतीश पांडेय, जिला कृषि अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें