बहराइच। मिहींपुरवा व महसी के बाद सरयू की बाढ़ ने कैसरगंज क्षेत्र को भी चपेट में ले लिया है। क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। तीनों तहसीलों में 144 गांव बाढ़ से घिरे हैं। करीब दो लाख की आबादी मुसीबतें झेल रही है। लोग घर की छतों व पेड़ों पर ठिकाना बनाए हैं। अधिकतर संपर्क मार्ग पानी में डूब हैं। नावों की पर्याप्त उपलब्धता न होने से लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर भी नहीं निकल पा रहे हैं। बचाव कार्यों की कलई खुलती नजर आ रही है।
कैसरगंज तहसील क्षेत्र के मंझारा तौकली, ग्यारह सौ रेती, गोड़हिया नंबर एक, दो, तीन, चार, मंगल मेला व खुर्रमपुर सहित दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय भी डूबे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की किल्लत से भी लोगों को जूझना पड़ रहा है। महसी के गरेठी गुरुदत्त सिंह, पचदेवरी, टेड़िया, चुरईपुरवा, बबुरी, समदा, शिवलोचनपुरवा, ग्राम पंचायत सिपहिया हुलास, चरीगाह, चौहानपुरवा, मांझा दरियाबुर्द, पिपरी, पिपरा, सिलौटा व तारापुरवा समेत दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी भरा होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मिहींपुरवा क्षेत्र में शनिवार को जलस्तर स्थिर होने से लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन रविवार को हालात फिर बिगड़ने लगे। सोमवार की सुबह गोपिया बैराज पर सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 60 सेंटीमीटर अधिक मापा गया। मिहींपुरवा क्षेत्र में जंगल गुलरिहा, गुप्तापुरवा, रामपुर रेतिया व त्रिलोकी गौढ़ी क्षेत्रों के ग्रामीण अपनी गृहस्थी समेत नावों से सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करते दिखे।
जिले में स्थित तीनों बैराजों से सोमवार को सात लाख, 47 हजार, 272 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। सरयू ड्रेनेज खंड, प्रथम के अवर अभियंता बीबी पाल ने बताया कि शारदा बैराज से एक लाख 60 हजार 996 क्यूसेक, गिरिजापुरी बैराज से पांच लाख, 12 हजार, 125 क्यूसेक व सरयू बैराज से 74 हजार, 151 क्यूूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
तहसील महसी, मिहींपुरवा व कैसरगंज में बड़ी संख्या में किसान विभिन्न फसलों के साथ ही सब्जियों की खेती भी करते हैं। इन्हें गैर जनपदों में बिक्री के लिए भेजा जाता है। बाढ़ के कारण खेतों में पानी भर जाने से आलू, धान व मक्का के अलावा सब्जियां भी सड़ रही हैं। इससे किसानों को खासा आर्थिक नुकसान हो रहा है।
मिहींपुरवा व नानपारा के कुछ हिस्सों में ग्रामीणों ने पेड़ों पर शरण ले रखी है। सोमवार को एनडीआरएफ व एसएसबी जवानों ने कई ग्रामीणों को पेड़ से उतारकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। ग्रामीणों के साथ गृहस्थी का सामान भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए मशक्कत की जा रही है। डीएम डॉ. दिनेश चंद्र व एसपी केशव चौधरी बाढ़ग्रस्त इलाका का भ्रमण कर रहे है। पर्याप्त सहायत पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।
कैसरगंज, महसी व मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र में सौ से अधिक परिषदीय विद्यालयों में पानी भर गया है। संपर्क मार्ग भी डूब गए हैं। विद्यालय बंद चल रहे हैं। पानी घटने के बाद भी संपर्क मार्गों पर जलभराव कम होने में काफी समय लग सकता है। इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ेगा।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सात ब्लॉकों में 339 स्वास्थ्य कर्मियों को तैनात किया गया है। इनमें मोतीपुर, अमवाहुसैनपुर, शिवपुर, महसी, फखरपुर, कैसरगंज व जरवल शामिल हैं। साथ ही दो सचल दस्ते भी गठित किए गए हैं। ये दस्ते भ्रमणशील रहते हुए लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीड़ितों की मदद के लिए प्रशासन की टीमें लगातार सक्रिय हैं। जरूरतमंदों को राहत सामग्री का वितरण कराया जा रहा है। पीड़ितों की हर संभव सहायता की कोशिश की जा रही है।
- डॉ. दिनेश चंद्र, डीएम