बहराइच। कतर्निया वन्य जीव विहार में कॉम्बिंग के लिए इस समय दो हथिनी जयमाला व चंपाकली हैं। कई बार ऐसा होता है कि जानवरों के हमले बढ़ जाते हैं। ऐसे में दो हथिनी से काम नहीं चल पाता है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए दो और हथिनी मंगाई जाएंगी। कॉम्बिंग के साथ ही पर्यटक इनकी सवारी का भी आनंद लेंगे।
कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग में इस समय करीब सवा सौ हाथी है। जंगल का काफी इलाका नेपाल से सटा हुआ है। ऐसे में नेपाली हाथी भी जंगल में आ जाते है। बताया जाता है कि नेपाली हाथी हिंसक होते हैं। ये जानवरों के साथ ही इंसानों पर भी हमला कर देते हैं। इसके अलावा बाघ और तेंदुओं के हमले भी होते रहते हैं। ऐसे स्थितियों में कॉम्बिंग की आवश्यकता पड़ती है। फिलहाल कॉम्बिंग के लिए यहां चंपाकली व जयमाला हैं। इन दोनों का काम हिंसक जानवरों के साथ ही नेपाली हाथियों को भी काबू करना हैं। वन विभाग ने लंबी ट्रेनिंग के बाद इन्हें कॉम्बिंग में लगाया है। अफसरों के मुताबिक, अब इन दो हथिनियों से काम नहीं चल पा रहा है। इसी वजह से दो और हथिनी लाई जाएंगी। इन्हें कहां से लाया जाए, इस पर विचार चल रहा है।
बीते साल हाथियों के हमले में एक महिला की मौत हो गई थी जबकि दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं थीं। अभी कुछ दिन पहले ही डीएफओ आकाशदीप बधावन जंगल गए थे जहां कुछ हाथियों ने उन्हें भी दौड़ा लिया था। वह किसी तरह से अपने वाहन से बचकर निकले थे। बता दें कि कतर्नियाघाट जंगल क्षेत्र में करीब 83 गांव बसे हैं। ऐसे में यहां पर हजारों की संख्या में लोग निवास भी करते हैं।
कतर्नियाघाट में अभी चंपाकली व जयमाला हैं। दो और हथिनी मंगाने का निर्णय हुआ है। जल्द ही ये जंगल में पहुंचा दी जाएंगी।
- आकाशदीप बधावन, डीएफओ