बहराइच। नेपाल सीमा से सटे जिले का तराई इलाका आतंकियों के साथ ही धार्मिक उन्माद फैलाने वाले संगठनों के लिए भी हमेशा से मुफीद पनाहगाह रहा है। दो साल पहले हुए हाथरस कांड के बाद भी धार्मिक उन्माद फैलाने के एक मामले में जरवल से ही पीएफआई का एक सदस्य मथुरा भी पुलिस के हत्थे चढ़ा था। अब कमरुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर से अब जरवल का पूरा इलाका चर्चा में है। इससे पहले भी कैसरगंज व रुपईडीहा समेत कई इलाकों में एसटीफ, एटीएस व एएनआईए की दबिश में कई आतंकी दबोचे जा चुके है।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रुपईडीहा में सौ किलोमीटर तक फैली दोनों देशों की खुली सीमा हमेशा से ही आतंकियों व धार्मिक उन्माद फैलाने वालों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह रही है। पीएफआई का नाता भी तराई क्षेत्र से काफी पुराना है। बीते पांच अक्तूबर 2020 को जरवल इलाके के वैराकाजी गांव निवासी मसूद अहमद को दिल्ली से हाथरस जाते समय मथुरा में टोल प्लाजा से मथुरा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मसूद अहमद दिल्ली जामिया यूनिवर्सिटी में एलएलबी की पढ़ाई कर रहा था और पीएफआई की स्टूडेंट विंग से जुड़ा था। जरवल इलाके के ही साहबे आलम को भी जरवल पुलिस ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट वायरल करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। साल 2019 में पथराव व तोड़फोड़ मामले में भी रिजवान समेत दो पीएफआई के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था।
बहराइच के नेपाल सीमा से सटे इलाके में लश्कर-ए--तैय्यबा के एक डिप्टी कमांडर इरफान का आवासीय ठिकाना होने की चर्चा भी आए दिन गर्म बनी रहती है। लगभग तीन-चार साल पहले सुरक्षा बलों ने भारत-नेपाल सीमा पर जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के तीन संदिग्ध आतंकियों को भी पकड़ने में सफलता पाई थी। बीते सितंबर 2021 में दिल्ली में एटीएस ने कैसरगंज के सोनारी चौराहा गांव निवासी अबु बकर को भी आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका में दबोचा था। दबोचे गए युवक ने देवबंद में तालीम प्राप्त की थी। संवाद
तराई जिले का पूरा इलाका ही काफी संवेदनशील है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रूपईडीहा बार्डर पूरी तरह खुली सीमा है। इसी लिए सुरक्षा निगरानी के लिए यहां पुलिस के साथ ही एसएसबी के जवान भी नियमित तौर पर पूरे 24 घंटे मुस्तैद रहते हैं। सीमा से सटे क्षेत्रों में भी थानाध्यक्षों को नियमित तौर पर गश्त कर संदिग्धों की धरपकड़ का निर्देश दिया गया है।
केशव चौधरी, एसपी बहराइच