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रुपईडीहा कस्बे के लोगों को सात साल से शुद्ध जल का इंतजार

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रुपईडीहा (बहराइच)। रुपईडीहा के लोगों को शुद्ध जल उपलब्ध कराने के लिए पांच साल पहले शुरू की गई कवायद अब तक पूरी नहीं हो पाई है। टंकी बनकर तैयार है। पाइप लाइन भी डाली जा चुकी है, लेकिन सभी आठ ट्यूबवेल लगाने व कनेक्शन देने का काम नहीं हुआ है। इसी वजह से लोग इंतजार को मजबूर हैं। बीती सात मई को इस सीमावर्ती इलाके के दौर पर पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री के सामने भी यह मामला आया था। मंत्री ने जलनिगम के अफसरों को 15 दिन में सब कुछ दुरुस्त कर जलापूर्ति शुरू कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक समस्या जस की तस है।
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भारत-नेपाल की सीमा पर मौजूद रुपईडीहा कस्बे में शुद्ध जल की आपूर्ति के लिए 2017 में काम शुरू हुआ था। तब पानी की टंकी का निर्माण शुुरू होने से स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। धीरे-धीरे पानी की टंकी बन भी गई। इसके बाद पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया गया। यह भी पूरा कर लिया गया। इससे लोगों में जल्द ही जलापूर्ति की उम्मीद जगी थी जो अब तक पूरी नहीं हो पाई है। लोगों का आरोप है कि जलनिगम के अधिकारियों से शिकायत की जाती है तो वे आश्वासन देकर टाल देते हैं।
प्रभारी मंत्री ने अफसरों को दिए थे निर्देश
सात मई को जिले के प्रभारी व सूक्ष्म लघु उद्योग मंत्री राकेश सचान ने सीमा क्षेत्र का भ्रमण किया था। इस दौरान आयोजित बैठक में स्थानीय समाजसेवियों व पत्रकारों ने पेयजल समस्या को प्रमुखता से उनके समक्ष रखा था। इसके बाद मंत्री राकेश सचान ने आश्वासन दिया था कि 15 दिन में जलापूर्ति शुरू करा देंगे। जलनिगम के अफसरों को निर्देश देते हुए जिलाधिकारी को भी फोन किया था। विडंबना है कि मंत्री की ओर से तय की गई समय सीमा बीतने के लंबे समय बाद भी समस्या जस की तस है।
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जलनिगम के जेई संदीप जायसवाल ने बताया कि करीब 2500 घरों में कनेक्शन देने हैं। इस तरह करीब 25 हजार लोग लाभांवित होंगे। यही नहीं सभी सार्वजनिक स्थानों मंदिर, मस्जिद, चौराहे आदि पर नल भी लगवाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जलापूर्ति के लिए आठ ट्यूबवेल लगने हैं। तीन का निर्माण करा लिया गया है, लेकिन बाकी पांच के लिए अच्छी जमीन नहीं मिल पा रही है। जो स्थान मिल रहे हैं वे या तो दलदली हैं या फिर नाले आदि के किनारे हैं। जब उनसे पूछा गया कि फिलहाल तीन ट्यूबवेल से ही आपूर्ति क्यों नहीं शुरू कराई जाती तो उन्होंने बताया कि क्षमता का मानक पूरा नहीं हो पा रहा है।
जलापूर्ति को लेकर जब जलनिगम के एक्सईएन सौरभ सुमन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बरसात की वजह से बोरवेल नहीं हो पाया है। दो-तीन दिनों में कस्बे का निरीक्षण कर बारवेल का कार्य शुरू कराया जाएगा।
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